MCB की ब्रेकिंग न्यूज़की ब्रेकिंग न्यूज़

देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज..
लोकेशन चिरमिरी
मंत्री जी से मदद की गुहार: प्राकृतिक आपदा में टूट गया गरीब मजदूर का आशियाना… तीन दिन से खुले घर में रहने को मजबूर जगलाल यादव परिवार, आखिर जाएं तो जाएं कहां?”
पट्टा नहीं तो राहत नहीं —
तहसीलदार के जवाब से टूटी गरीब परिवार की उम्मीद
चिरमिरी।
चिरमिरी नगर निगम वार्ड क्रमांक-8 पल्थाजाम में रहने वाले गरीब मजदूर जगलाल यादव का घर पहली ही बरसात, तेज आंधी और तूफान में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। वर्षों की मेहनत से बनाया गया उनका आशियाना कुछ ही मिनटों में उजड़ गया। घर की पूरी सीट उड़ गई, खपरा टूट गया, राशन-पानी बर्बाद हो गया और छोटे-छोटे बच्चों के साथ पूरा परिवार पिछले तीन दिनों से खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर है।
सबसे दुखद बात यह है कि घटना के तीन दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को नगर निगम, तहसील प्रशासन या किसी जनप्रतिनिधि की ओर से कोई राहत सहायता नहीं मिल सकी है। अब जगलाल यादव ने स्थानीय मंत्री जी, विधायक और महापौर से मदद की गुहार लगाई है ताकि उनका उजड़ा हुआ घर दोबारा बस सके।
स्थानीय निवासी जगलाल यादव पिछले लगभग 30 से 40 वर्षों से पल्थाजाम क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। मजदूरी और मिस्त्री का काम कर प्रतिदिन लगभग 400 रुपए कमाने वाले जगलाल ने एक-एक रुपए जोड़कर अपना घर बनाया था। लेकिन 21 जून की तेज आंधी और बारिश ने उनकी वर्षों की मेहनत को तहस-नहस कर दिया। अनुमानित 15 से 20 हजार रुपए का नुकसान बताया जा रहा है।
पीड़ित परिवार ने बताया कि आंधी-तूफान के दौरान पूरा घर पानी से भर गया। छोटे बच्चे रातभर भूखे और डरे हुए बैठे रहे। घर में रखा राशन और जरूरी सामान भी पूरी तरह खराब हो गया। अब बरसात सामने है और घर की छत पूरी तरह खुली पड़ी हुई है। हर बादल के साथ परिवार के सिर पर फिर एक नई चिंता मंडरा रही है।
घटना की जानकारी मिलने पर स्थानीय पार्षद मौके पर पहुंचे और नुकसान का निरीक्षण किया। पार्षद द्वारा पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया गया कि तहसील स्तर पर कागजी प्रक्रिया कराकर राहत दिलाने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन अब तक परिवार को किसी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है।
जब इस मामले में स्थानीय तहसीलदार से संपर्क किया गया तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जिन लोगों के पास स्थानीय भूमि का पट्टा और वैध दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें प्रशासनिक राहत राशि मिल पाना संभव नहीं है। तहसीलदार के इस जवाब के बाद गरीब परिवार की उम्मीदें लगभग टूट गई हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि चिरमिरी शहर में वर्षों से रह रहे वे हजारों गरीब परिवार आखिर जाएं तो जाएं कहां, जिनके पास आज तक भूमि का पट्टा नहीं है? जानकारी के अनुसार चिरमिरी के लगभग 80 से 90 प्रतिशत स्थानीय निवासियों के पास शहरी भूमि पट्टा नहीं है। लोग दशकों से यहां निवास कर रहे हैं, नगर निगम को टैक्स भी देते हैं, लेकिन जब प्राकृतिक आपदा आती है तो उन्हें “रिकॉर्ड में नहीं” कहकर सहायता से वंचित कर दिया जाता है।
एक ओर नगर निगम टैक्स वसूलती है, दूसरी ओर जरूरत पड़ने पर गरीबों को कागज के नाम पर दर-दर भटकने के लिए छोड़ दिया जाता है। आखिर गरीब मजदूर किसके भरोसे अपना जीवन चलाए?
चिरमिरी कोयला क्षेत्र होने के कारण यहां एसईसीएल और कोल माइंस वर्षों से खनन कार्य कर रही हैं। शहर की जमीनें, पहाड़ और बस्तियां लगातार प्रभावित हुई हैं, लेकिन पीढ़ियों से रह रहे गरीब परिवारों को आज तक स्थायी अधिकार और भूमि पट्टा नहीं मिल सका। यही कारण है कि प्राकृतिक आपदा आने पर सबसे ज्यादा मार गरीब मजदूर और आम जनता पर पड़ती है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि पल्थाजाम सहित कई वार्डों में आंधी-तूफान के कारण पेड़ गिरे, दुकानें और घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिनके पास पट्टा और रिकॉर्ड है, उन्हें मुआवजा मिल जाएगा, लेकिन रोजाना 400 रुपए कमाने वाला मजदूर जगलाल यादव आखिर किसके पास मदद मांगने जाए?
वार्डवासियों ने स्थानीय मंत्री जी, महापौर और विधायक से मांग की है कि मानवीय आधार पर तत्काल आर्थिक सहायता देकर गरीब परिवार का घर दोबारा बनवाया जाए। क्योंकि बरसात अभी बाकी है और खुले घर में छोटे बच्चों के साथ रहना किसी बड़े हादसे को भी जन्म दे सकता है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जनप्रतिनिधि गरीब परिवार के आंसू पोंछते हैं या फिर “पट्टा नहीं है” कहकर यह परिवार यूं ही सिस्टम के दरवाजों पर भटकता रहेगा।

मदद की गुहार जनप्रतिनिधि महापौर मंत्री जी से 3 दिन से खुला पड़ा है घर

15 से 20000 का उड़ गया सीट. खपरा. एक-एक रुपए करके जुटा था और घर बनाया था तीन दिन से खुले में रहने की मजबूरी अब तक किसी प्रकार की मदद नहीं

परिवार का दुख उदा आशियाना कब मिलेगी मदद कब बनेगा घर

समाचार एवं विज्ञापन या इश्तिहार के लिए संपर्क करें 7000131841



