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देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज

एमसी बी.जिला की खबर

 

स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) एवं स्कूल प्रबंधन विकास समिति (SMDC) का होगा पुनर्गठन

सभी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं सरकारी स्कूलों में नए नियम लागू, अब अभिभावकों के हाथ में होगी स्कूलों की कमान

 

 

 

 

छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय महानदी भवन, अटल नगर नवा रायपुर द्वारा जारी नए आदेश के बाद प्रदेश के सभी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं सरकारी स्कूलों में शाला प्रबंधन समिति (SMC) एवं शाला प्रबंधन एवं विकास समिति (SMDC) का पुनर्गठन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। शासन के निर्देशानुसार यह गठन प्रत्येक वर्ष शाला प्रवेश उत्सव के दौरान 31 जून से 31 जुलाई तक किया जाना तय किया गया है।

सरकार के इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। नए नियम लागू होने के बाद अब किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े पार्षद, सांसद प्रतिनिधि, विधायक प्रतिनिधि या अन्य राजनीतिक व्यक्तियों को समितियों में सदस्य नहीं बनाया जाएगा। पहले कई स्कूलों में राजनीतिक प्रभाव वाले लोगों की भागीदारी के कारण समितियों में एकतरफा व्यवस्था बनी रहती थी, जिससे आम अभिभावकों की आवाज दब जाती थी। अब शासन ने पुराने सभी गठन को समाप्त कर नए नियमों के अनुसार पुनर्गठन अनिवार्य कर दिया है।

नए प्रावधान के तहत समिति में 75 प्रतिशत सदस्य विद्यार्थियों के माता-पिता या कानूनी अभिभावक होंगे। साथ ही महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए 50 प्रतिशत महिला आरक्षण भी अनिवार्य किया गया है। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चयन भी केवल बच्चों के अभिभावकों में से किया जाएगा। इस फैसले को शिक्षा व्यवस्था में जनभागीदारी और पारदर्शिता बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

शिक्षा विभाग के इस निर्णय से आम नागरिकों और अभिभावकों में उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि पहले वर्षों तक एक ही समिति बनी रहती थी, जिससे कई महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित होते थे। जब किसी समिति में केवल एक ही पक्ष का प्रभाव रहता है तो स्कूलों के विकास कार्य, निगरानी और जवाबदेही कमजोर पड़ जाती है। वहीं विपक्षी सोच, बाहरी निगरानी और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी रहने से कार्यों पर लगातार नजर बनी रहती है और गड़बड़ियों पर रोक लगती है। यही कारण है कि शासन अब सीधे अभिभावकों को स्कूल प्रबंधन में सबसे बड़ी भूमिका देने जा रहा है।

जानकारी के अनुसार कई स्कूलों में अभी भी पुराने गठन संचालित हो रहे हैं। इसी क्रम में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हल्दीबाड़ी (चिरमिरी) का मामला भी सामने आया है। आरटीआई के माध्यम से प्राप्त जानकारी में विद्यालय प्रशासन द्वारा पुराने SMDC गठन की जानकारी दी गई थी, जिसमें पुराने सदस्यों के नाम दर्ज बताए गए हैं। हालांकि अब शासन के नए आदेश लागू होने के बाद यह पुराने गठन मान्य नहीं रहेंगे और नए नियमों के अनुसार पुनर्गठन करना अनिवार्य होगा।

सूत्रों के अनुसार पहले गठित समितियों में राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्तियों और प्रभावशाली लोगों की भागीदारी रहती थी, जिससे आम अभिभावकों और नागरिकों को समिति के कार्यों की जानकारी तक नहीं मिल पाती थी। कई मामलों में स्कूलों की वास्तविक समस्याएं जैसे शिक्षकों की कमी, भवन मरम्मत, पेयजल, शौचालय, मध्यान्ह भोजन और पढ़ाई की गुणवत्ता जैसे मुद्दे पीछे छूट जाते थे। अब नए नियम लागू होने के बाद अभिभावकों की सीधी भागीदारी से स्कूलों में पारदर्शिता बढ़ने और विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

अभिभावकों का कहना है कि यह फैसला बच्चों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। अब स्कूलों के संचालन और विकास कार्यों में उन्हीं लोगों की भागीदारी होगी जिनके बच्चे वहां अध्ययन कर रहे हैं। इससे स्कूलों की निगरानी मजबूत होगी और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही भी बढ़ेगी।

शिक्षा विभाग के इस फैसले को प्रदेशभर में अभिभावक हित में लिया गया बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में व्यापक सुधार देखने को मिल सकता

जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय

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(7000131841)

 

 

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