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“ देवेंद्र सिंह चंदेल
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बीपीएल राशन कार्ड धारक.तीन माह का राशन, पर अधूरा हक: चावल मिला, चना-शक्कर गायब — गरीबों का अधिकार क्यों कुचला जा रहा?”

योजना में सुविधा का दावा, जमीनी हकीकत में अव्यवस्था — चिरमिरी में राशन कार्ड धारकों का फूटा गुस्सा, प्रशासन मौन
चिरमिरी/एमसीबी, छत्तीसगढ़ | विशेष रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा अप्रैल, मई और जून 2026 के लिए तीन माह का राशन एक साथ वितरित करने की योजना लागू की गई है। इस योजना का उद्देश्य स्पष्ट रूप से यह बताया गया कि राशन कार्ड धारक, विशेषकर महिलाएं, तपती धूप में घंटों लंबी कतारों में खड़े होकर परेशान न हों और उन्हें एकमुश्त राहत मिल सके। शासन स्तर पर इसे जनहित में बड़ा फैसला बताया गया, लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे से बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
योजना के तहत जहां तीन माह का राशन एक साथ दिए जाने की बात कही गई, वहीं वास्तविकता यह है कि कई स्थानों पर केवल चावल का ही वितरण किया जा रहा है, जबकि चना और शक्कर जैसी आवश्यक सामग्री पूरी तरह से नदारद है। इससे बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या यह योजना सिर्फ “चावल वितरण योजना” बनकर रह गई है? यदि ऐसा है, तो फिर राशन कार्ड धारकों के पूर्ण अधिकारों का क्या होगा?
चिरमिरी क्षेत्र में लगातार राशन कार्ड धारकों द्वारा शिकायतें सामने आ रही हैं कि अप्रैल माह समाप्त होने के बावजूद चना और शक्कर का वितरण नहीं किया गया। वार्ड क्रमांक 12 हल्दीबाड़ी की दुकान क्रमांक 1024 और 1005 सहित कई शासकीय उचित मूल्य दुकानों में उपभोक्ताओं को साफ कह दिया गया कि “माल नहीं आया है, आने पर मिलेगा।” यह स्थिति सिर्फ एक दुकान की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में आम हो चुकी है।
सबसे गंभीर पहलू यह है कि जब एक माह का राशन नहीं मिलता, तो अगले माह में उसका कोटा भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं कराया जाता। ऐसे में यह बड़ा सवाल उठता है कि यदि अप्रैल का चना-शक्कर नहीं मिला, तो मई में वह कैसे मिलेगा? क्या यह अधिकार भी फाइलों में दबा दिया गया है?
इस गंभीर समस्या को लेकर संवाददाता द्वारा लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया। चिरमिरी एसडीएम से कई बार संपर्क साधा गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना तक उचित नहीं समझा। जिला खाद्य अधिकारी से संपर्क करने पर उन्होंने “मीटिंग में हूं, देखता हूं” कहकर बात टाल दी। वहीं फूड इंस्पेक्टर सदानंद पैकरा ने बताया कि “अभी कहीं भी चना-शक्कर का वितरण नहीं हो रहा है, मई में मिलेगा।”
प्रशासन के इस ढुलमुल रवैये ने आम जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। राशन कार्ड धारकों का कहना है कि यदि उन्हें हर महीने चना-शक्कर लेने के लिए फिर से लाइन में लगना ही पड़ेगा, तो तीन माह का राशन एक साथ देने की योजना का क्या औचित्य रह जाता है?
इधर 30 अप्रैल को खाद्य आयोग के अध्यक्ष संदीप शर्मा के सूरजपुर प्रवास के दौरान बैठक में अधिकारियों को तीन माह का राशन वितरण सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए गए और कई दुकानों का निरीक्षण भी किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस पूरे निर्देश में चना और शक्कर के वितरण को लेकर कोई स्पष्टता या सख्ती सामने नहीं आई। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं यह योजना सिर्फ कागजों तक सीमित तो नहीं?
जनता के बीच यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि एक साथ तीन माह का चावल मिलने से कई लोग मजबूरी या लालच में उसका कुछ हिस्सा बेच देते हैं, जिससे अंततः नुकसान उन्हीं गरीब परिवारों का होता है और फायदा दुकानदारों को मिलता है। इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी का अभाव साफ दिखाई दे रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बार-बार गरीबों और मध्यम वर्ग के राशन कार्ड धारकों के अधिकारों पर ही क्यों कटौती होती है? चना-शक्कर जैसी बुनियादी खाद्य सामग्री, जो गरीबों के पोषण का अहम हिस्सा है, उसे लगातार नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है या फिर किसी बड़े स्तर की अनदेखी?
जनता में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब राशन कार्ड धारकों और आम गरीब जनता के अधिकारों में कटौती की जा सकती है, तो मंत्री, नेता और विधायकों को मिलने वाली सुविधाओं में कटौती क्यों नहीं की जाती? उन्हें मिलने वाली पेंशन, वेतन, एसी बंगला, गार्ड, पेट्रोल-डीजल, हवाई यात्रा और अन्य सुविधाओं पर भी कटौती होनी चाहिए, ताकि उन्हें आम जनता के दर्द और तकलीफ का एहसास हो सके।
जनता ने अपने विश्वास पर वोट दिया है और यह उनका अधिकार है कि उन्हें उनका पूरा हक मिले। लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि आम आदमी अपने ही अधिकारों के लिए भटक रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला कलेक्टर से लेकर खाद्य विभाग तक, जिनको शिकायतें व्हाट्सएप के माध्यम से भेजी गई हैं, वे इस पर क्या ठोस कार्रवाई करते हैं। क्या प्रशासन इस समस्या का समाधान करेगा या फिर गरीबों का अधिकार यूं ही दबता रहेगा?

जिला खाद्य अधिकारी

शासकीय उचित मूल्य दुकान 1005 दुकान क्रमांक

शासकीय उचित मूल्य दुकान 1024 वार्ड क्रमांक 12

चिरमिरी एसडीएम विभाग दंड अनुविभागीय अधिकारी

चिरमिरी फुल इंस्पेक्टर सदानंद पैकरा

 

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