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चिरमिरी नगर निगम में समस्याओं का अंबार, ट्रिपल इंजन सरकार का टायर पंचर!

दैनिक आदित्य समय

करोड़ों के भूमि पूजन के बाद भी विकास कछुए की चाल, जनता पूछ रही – आखिर जवाबदेह कौन?

चिरमिरी। चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। ट्रिपल इंजन सरकार को बने लगभग 2 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन शहर की तस्वीर में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आ रहा। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का भूमि पूजन और लोकार्पण तो लगातार हो रहा है, लेकिन धरातल पर कई योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हुई हैं। ऐसे में आम जनता सवाल उठा रही है कि आखिर विकास की यह धीमी रफ्तार किसकी जिम्मेदारी है और जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?

शहर में जगह-जगह करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के शिलान्यास और भूमि पूजन के बोर्ड दिखाई देते हैं, लेकिन हकीकत में कई निर्माण कार्य आज भी कछुए की चाल से आगे बढ़ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर एक ही दल की सरकार है तो निर्माण एजेंसियों को समय-सीमा में कार्य पूरा करने के लिए सख्त निर्देश क्यों नहीं दिए जाते? आखिर ऐसी क्या वजह है कि कई परियोजनाएं महीनों और वर्षों तक अधूरी पड़ी रहती हैं और जनता सिर्फ घोषणाएं सुनती रहती है।

पेयजल व्यवस्था को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है। नागरिकों का कहना है कि पहले सीमित संसाधनों और कम बजट के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में प्रतिदिन पानी की सप्लाई होती थी। लेकिन आज करोड़ों रुपये की योजनाओं, विकास के दावों और ट्रिपल इंजन सरकार के बावजूद कई वार्डों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यही “पहले और अब” का सबसे बड़ा अंतर है। जहां पहले रोज पानी पहुंचता था, वहीं आज नागरिकों को पानी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब बजट बढ़ा, योजनाएं बढ़ीं और संसाधन बढ़े, तो फिर पानी की उपलब्धता क्यों घट गई? आखिर ऐसा क्या बदला कि नियमित जलापूर्ति अब कटौती के साथ होने लगी? यह सवाल आज शहर के हर मोहल्ले और हर घर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

बरसात का मौसम सामने है, लेकिन शहर के अधिकांश नाले और नालियां अब भी गंदगी से पटे हुए हैं। कई क्षेत्रों में सफाई कार्य अधूरा दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते नालों और नालियों की सफाई नहीं हुई तो बरसात के दौरान जलभराव की समस्या विकराल रूप ले सकती है। हर साल की तरह इस वर्ष भी लोगों को डर है कि बारिश आते ही सड़कें तालाब बन जाएंगी और घरों तक पानी पहुंचने लगेगा।

सड़कों की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। कई मुख्य मार्ग और वार्डों की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। जगह-जगह टूटे हुए रास्ते, उखड़ी सड़कें और अधूरे निर्माण कार्य विकास के दावों की पोल खोलते नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि भूमि पूजन के बाद यदि निर्माण कार्य वर्षों तक अधूरे रहें तो ऐसे विकास का आम जनता को क्या लाभ?

वहीं शहर के अनेक हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हुई हैं। शाम होते ही कई मोहल्ले अंधेरे में डूब जाते हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि पार्षद निधि से लाइट खरीदी जाएगी तब ही नई लाइट लगेगी, ऐसी चर्चाएं आम हो चुकी हैं। जबकि नगर निगम को प्राथमिकता के आधार पर शहर की प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए।

नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि कई बार डीजल और पेट्रोल की उपलब्धता प्रभावित होने से निगम के कुछ कार्यों की गति पर असर पड़ता है। ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि जब सरकार और निगम दोनों के पास पर्याप्त संसाधन और बजट होने का दावा किया जाता है तो फिर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं कमजोर क्यों दिखाई देती हैं?

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सोशल मीडिया पर उपलब्धियों और योजनाओं का प्रचार-प्रसार खूब किया जाता है, लेकिन जब वास्तविक समस्याओं और जनता के सवालों की बात आती है तो जवाब कम ही दिखाई देता है। शहर में पानी, सड़क, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर लोगों की परेशानियां लगातार बनी हुई हैं।

जनता के प्रमुख सवाल हैं—

करोड़ों रुपये के भूमि पूजन के बाद भी कई निर्माण कार्य अधूरे क्यों हैं?

निर्माण एजेंसियों पर समय-सीमा में कार्य पूरा करने का दबाव क्यों नहीं बनाया जा रहा?

पहले प्रतिदिन मिलने वाला पानी अब एक दिन छोड़कर क्यों दिया जा रहा है?

बरसात से पहले नालों और नालियों की सफाई कब पूरी होगी?

बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें कब चालू होंगी?

जर्जर सड़कों की मरम्मत और अधूरे निर्माण कार्य कब पूरे होंगे?

आखिर ट्रिपल इंजन सरकार का लाभ आम नागरिकों को धरातल पर कब दिखाई देगा?

चिरमिरी की जनता का कहना है कि अब केवल शिलान्यास, भूमि पूजन और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। जनता को धरातल पर परिणाम चाहिए। लगभग 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी यदि शहर पानी, सड़क, नाली, सफाई और रोशनी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। चिरमिरी की जनता अब विकास के दावों नहीं, बल्कि विकास की वास्तविक तस्वीर देखना चाहती है।देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज

 

 

ब्रेकिंग न्यूज़ नगर निगम चिरमिरी की

 

चिरमिरी नगर निगम में समस्याओं का अंबार, ट्रिपल इंजन सरकार का टायर पंचर!

 

करोड़ों के भूमि पूजन के बाद भी विकास कछुए की चाल, जनता पूछ रही – आखिर जवाबदेह कौन?

चिरमिरी। चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। ट्रिपल इंजन सरकार को बने लगभग 2 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन शहर की तस्वीर में अपेक्षित बदलाव नजर नहीं आ रहा। करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का भूमि पूजन और लोकार्पण तो लगातार हो रहा है, लेकिन धरातल पर कई योजनाएं आज भी अधूरी पड़ी हुई हैं। ऐसे में आम जनता सवाल उठा रही है कि आखिर विकास की यह धीमी रफ्तार किसकी जिम्मेदारी है और जनता को मूलभूत सुविधाओं के लिए कब तक इंतजार करना पड़ेगा?

शहर में जगह-जगह करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के शिलान्यास और भूमि पूजन के बोर्ड दिखाई देते हैं, लेकिन हकीकत में कई निर्माण कार्य आज भी कछुए की चाल से आगे बढ़ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर एक ही दल की सरकार है तो निर्माण एजेंसियों को समय-सीमा में कार्य पूरा करने के लिए सख्त निर्देश क्यों नहीं दिए जाते? आखिर ऐसी क्या वजह है कि कई परियोजनाएं महीनों और वर्षों तक अधूरी पड़ी रहती हैं और जनता सिर्फ घोषणाएं सुनती रहती है।

पेयजल व्यवस्था को लेकर भी लोगों के बीच चर्चा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है। नागरिकों का कहना है कि पहले सीमित संसाधनों और कम बजट के बावजूद अधिकांश क्षेत्रों में प्रतिदिन पानी की सप्लाई होती थी। लेकिन आज करोड़ों रुपये की योजनाओं, विकास के दावों और ट्रिपल इंजन सरकार के बावजूद कई वार्डों में एक दिन छोड़कर पानी दिया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यही “पहले और अब” का सबसे बड़ा अंतर है। जहां पहले रोज पानी पहुंचता था, वहीं आज नागरिकों को पानी के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि जब बजट बढ़ा, योजनाएं बढ़ीं और संसाधन बढ़े, तो फिर पानी की उपलब्धता क्यों घट गई? आखिर ऐसा क्या बदला कि नियमित जलापूर्ति अब कटौती के साथ होने लगी? यह सवाल आज शहर के हर मोहल्ले और हर घर में चर्चा का विषय बना हुआ है।

बरसात का मौसम सामने है, लेकिन शहर के अधिकांश नाले और नालियां अब भी गंदगी से पटे हुए हैं। कई क्षेत्रों में सफाई कार्य अधूरा दिखाई दे रहा है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते नालों और नालियों की सफाई नहीं हुई तो बरसात के दौरान जलभराव की समस्या विकराल रूप ले सकती है। हर साल की तरह इस वर्ष भी लोगों को डर है कि बारिश आते ही सड़कें तालाब बन जाएंगी और घरों तक पानी पहुंचने लगेगा।

सड़कों की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। कई मुख्य मार्ग और वार्डों की सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। जगह-जगह टूटे हुए रास्ते, उखड़ी सड़कें और अधूरे निर्माण कार्य विकास के दावों की पोल खोलते नजर आते हैं। लोगों का कहना है कि भूमि पूजन के बाद यदि निर्माण कार्य वर्षों तक अधूरे रहें तो ऐसे विकास का आम जनता को क्या लाभ?

वहीं शहर के अनेक हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी हुई हैं। शाम होते ही कई मोहल्ले अंधेरे में डूब जाते हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि पार्षद निधि से लाइट खरीदी जाएगी तब ही नई लाइट लगेगी, ऐसी चर्चाएं आम हो चुकी हैं। जबकि नगर निगम को प्राथमिकता के आधार पर शहर की प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए।

नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि कई बार डीजल और पेट्रोल की उपलब्धता प्रभावित होने से निगम के कुछ कार्यों की गति पर असर पड़ता है। ऐसे में लोग पूछ रहे हैं कि जब सरकार और निगम दोनों के पास पर्याप्त संसाधन और बजट होने का दावा किया जाता है तो फिर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं कमजोर क्यों दिखाई देती हैं?

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सोशल मीडिया पर उपलब्धियों और योजनाओं का प्रचार-प्रसार खूब किया जाता है, लेकिन जब वास्तविक समस्याओं और जनता के सवालों की बात आती है तो जवाब कम ही दिखाई देता है। शहर में पानी, सड़क, सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अधूरे निर्माण कार्यों को लेकर लोगों की परेशानियां लगातार बनी हुई हैं।

जनता के प्रमुख सवाल हैं—

करोड़ों रुपये के भूमि पूजन के बाद भी कई निर्माण कार्य अधूरे क्यों हैं?

निर्माण एजेंसियों पर समय-सीमा में कार्य पूरा करने का दबाव क्यों नहीं बनाया जा रहा?

पहले प्रतिदिन मिलने वाला पानी अब एक दिन छोड़कर क्यों दिया जा रहा है?

बरसात से पहले नालों और नालियों की सफाई कब पूरी होगी?

बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटें कब चालू होंगी?

जर्जर सड़कों की मरम्मत और अधूरे निर्माण कार्य कब पूरे होंगे?

आखिर ट्रिपल इंजन सरकार का लाभ आम नागरिकों को धरातल पर कब दिखाई देगा?

चिरमिरी की जनता का कहना है कि अब केवल शिलान्यास, भूमि पूजन और घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। जनता को धरातल पर परिणाम चाहिए। लगभग 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी यदि शहर पानी, सड़क, नाली, सफाई और रोशनी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे। चिरमिरी की जनता अब विकास के दावों नहीं, बल्कि विकास की वास्तवि हैक तस्वीर देखना चाहती है।

 

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