चिरमिरी की खास खबर

देवेंद्र सिंह चंदेल
भारत की आवाज
📍 लोकेशन : चिरमिरी रेलवे स्टेशन
एक हफ्ते का इंतजार झूठा निकला: DRM के आने की चर्चा बनी अफवाह, सिर्फ सुरक्षा अधिकारी पहुंचे, जनता की समस्याएं फिर अनसुनी
चिरमिरी रेलवे की बदहाली पर फिर नहीं हुई सुनवाई, मीडिया-जनप्रतिनिधि और आम जनता करती रही इंतजार
चिरमिरी, 27 जून 2026।
पिछले एक हफ्ते से चिरमिरी शहर में रेलवे के DRM (डिविजनल रेलवे मैनेजर) एवं बड़े रेलवे अधिकारियों के आने की जनचर्चा लगातार बनी हुई थी। मीडिया, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों को उम्मीद थी कि वर्षों से चली आ रही रेलवे समस्याओं को लेकर अधिकारियों के सामने अपनी बात रखी जाएगी और समाधान की दिशा में कोई पहल होगी। लेकिन शनिवार 27 जून को पूरा इंतजार आखिरकार झूठा साबित हुआ।
दिनभर शहर में चर्चाएं होती रहीं कि DRM सहित रेलवे के बड़े अधिकारी चिरमिरी पहुंचेंगे, मगर बाद में जानकारी मिली कि केवल रेलवे सुरक्षा विभाग के कुछ अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था का निरीक्षण करने पहुंचे थे। उन्होंने न तो किसी प्रकार का ज्ञापन लिया, न मीडिया से संपर्क किया और न ही आम जनता की समस्याओं को सुनने की कोई पहल की। इससे शहरवासियों में भारी नाराजगी देखने को मिली।
चिरमिरी लास्ट रेलवे स्टेशन होने के कारण वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहा है। यहां बड़े अधिकारियों का आना लगभग बंद सा हो गया है। यही कारण है कि रेलवे से जुड़ी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं और उनका समाधान नहीं हो पा रहा।
समस्याओं की लंबी फेहरिस्त, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं
चिरमिरी रेलवे स्टेशन और रेलवे व्यवस्था को लेकर जनता की कई गंभीर मांगें और शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। अगर समस्याओं को गिनने बैठें तो समय कम पड़ जाएगा।
कटनी से चिरमिरी और चिरमिरी से कटनी चलने वाली रात की सटल ट्रेन में गंदगी का आलम बना रहता है। यात्रियों का आरोप है कि ट्रेन के टॉयलेट और बाथरूम की सफाई नहीं होती, पानी तक उपलब्ध नहीं रहता और पूरी यात्रा के दौरान सफाई व्यवस्था भगवान भरोसे चलती है।
रेलवे स्टेशन में सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। किसी दुर्घटना या हादसे में घंटों तक शव पड़े रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं, क्योंकि चिरमिरी में रेलवे सुरक्षा पुलिस का पर्याप्त स्टाफ मौजूद नहीं रहता और महेंद्रगढ़ से टीम आने का इंतजार करना पड़ता है।
पुलिया बनी परेशानी का कारण
कुछ वर्ष पहले रेलवे स्टेशन में बनाई गई पुलिया भी लोगों के लिए सुविधा कम, परेशानी ज्यादा बन गई है। रात के समय वहां अंधेरा रहता है क्योंकि स्ट्रीट लाइट तक नहीं लगाई गई। बरसात में पुलिया पानी से भर जाती है, जिससे लोगों का आना-जाना तक बंद हो जाता है। स्थानीय लोगों और पूर्व पार्षदों द्वारा कई बार DRM को लिखित शिकायत और मांग भेजी गई, लेकिन वर्षों बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
रेलवे क्वार्टर बन रहे खंडहर
रेलवे के कई पुराने क्वार्टर खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। वहां लगातार चोरी की घटनाएं सामने आ रही हैं। दरवाजे, सीट, वायरिंग तक चोरी हो चुकी है। सवाल यह उठता है कि जिस रेलवे में कड़े नियमों की बात कही जाती है, वहां अपनी ही संपत्तियों की सुरक्षा क्यों नहीं हो पा रही।
स्टेशन में सुरक्षा और सुविधाओं की भारी कमी
रेलवे स्टेशन में महिला सुरक्षा कर्मियों की कमी, पेयजल व्यवस्था की खराब स्थिति और साफ-सफाई की लचर व्यवस्था से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रात के समय स्टेशन परिसर में असामाजिक तत्वों द्वारा शराब, गांजा और नशाखोरी किए जाने की शिकायतें लगातार मिलती रहती हैं, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आते।
इतना ही नहीं, स्टेशन में होने वाला अनाउंसमेंट भी यात्रियों को ठीक से सुनाई नहीं देता। लोगों का कहना है कि पहले आवाज स्पष्ट आती थी, लेकिन अब वॉल्यूम इतना कम कर दिया गया है कि यात्रियों को ट्रेन की जानकारी तक नहीं मिल पाती।
कोयलांचल क्षेत्र होने के बावजूद उपेक्षा
चिरमिरी देश के प्रमुख कोयलांचल क्षेत्रों में से एक है। यहां का कोयला लगातार रेलवे के माध्यम से देशभर में पहुंचाया जाता है, लेकिन विडंबना यह है कि जिस क्षेत्र से रेलवे को इतना बड़ा राजस्व मिलता है, वहीं के लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
रेलवे स्टेशन में नए ओवरब्रिज, नई ट्रेनों की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी मांगें वर्षों से लंबित हैं। मगर हर बार आश्वासन और चर्चाओं के बाद भी हालात नहीं बदलते।
अब सवाल यही है कि आखिर चिरमिरी की समस्याओं पर रेलवे के बड़े अधिकारी कब ध्यान देंगे? कब DRM और रेलवे प्रशासन यहां पहुंचकर जनता की बात सुनेंगे? क्योंकि फिलहाल तो 27 जून का इंतजार भी केवल चर्चा बनकर रह गया और जनता की उम्मीदें
एक बार फिर टूट गईं।
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