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देवेंद्र सिंह चंदेल

लोकेशन: रायपुर, छत्तीसगढ़

“नटकी गांव के 85 परिवारों के सपनों की कब्र पर बनेगा विधायक कॉलोनी का महल!”

बुलडोजर की गूंज से कांपा रायपुर, गरीबों के उजड़े आशियानों पर सत्ता की संवेदनहीनता पर उठे बड़े सवाल

रायपुर के नटकी गांव में जो दृश्य सामने आया, उसने पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर कर रख दिया। 40 से 60 वर्षों से बसे 85 गरीब परिवारों के घरों को बुलडोजर से मलबे में बदल दिया गया। जिन घरों में बच्चों का बचपन पल रहा था, जहां बुजुर्गों की यादें थीं, जहां महिलाओं ने जिंदगी भर की कमाई लगाकर अपना आशियाना बनाया था, आज वहां सिर्फ टूटी दीवारें, बिखरे सपने और लोगों की आंखों में आंसू नजर आ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन परिवारों को “अवैध कब्जाधारी” बताकर हटाया गया, उन्हीं घरों में वर्षों तक सरकारी योजनाएं चलाई गईं। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया, बिजली के पोल लगाए गए, पानी और अन्य सुविधाएं पहुंचाई गईं। सवाल यह उठ रहा है कि अगर जमीन अवैध थी, तो फिर सरकारें इतने सालों तक वहां योजनाएं क्यों चलाती रहीं? चुनाव के समय कभी नोटिस क्यों नहीं दिया गया? कार्रवाई तब क्यों हुई जब सत्ता पूरी तरह मजबूत हो गई?

गांव में इस कार्रवाई के बाद भारी गुस्सा है। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग तक सड़कों पर उतर आए हैं। लोग खुलकर भाजपा सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। स्थानीय विधायक अनुज शर्मा और वरिष्ठ भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ ग्रामीणों में तीखा आक्रोश देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि भरोसा दिया गया था कि “बीच का रास्ता निकलेगा”, लेकिन रात करीब 3 बजे बुलडोजर चलाकर गरीबों का सब कुछ उजाड़ दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि आखिर ऐसी क्या जरूरत पड़ गई थी कि विधायक कॉलोनी बनाने के लिए गरीबों के घर ही चुने गए? क्या नेताओं के लिए बनने वाले आलीशान मकानों की नींव गरीबों के टूटे सपनों पर रखी जाएगी? क्या राजधानी में और कोई जमीन नहीं बची थी?

सबसे दर्दनाक बात यह बताई जा रही है कि जिन परिवारों को हटाया गया, उन्हें जिन मकानों में भेजा गया वहां मूलभूत सुविधाओं का भारी अभाव है। लोगों के अनुसार कई जगह पानी, बिजली, शौचालय और रहने की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं है। बड़े परिवार छोटे कमरों में किसी तरह रहने को मजबूर हैं। जिन लोगों के पास अपना खुला घर था, वे आज घुटन और मजबूरी में जिंदगी काट रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर एक ओर बुलडोजर कार्रवाई की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर नेताओं की बैठकों और टिफिन पार्टी की तस्वीरों ने जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब गरीबों की दुनिया उजड़ रही थी, तब सत्ता के गलियारों में संवेदनशीलता क्यों नहीं दिखाई गई?

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत विपक्ष ने भी इस कार्रवाई को अमानवीय बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष का कहना है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में ऐसा दृश्य पहले कभी नहीं देखा गया, जहां गरीबों के आशियाने उजाड़कर सत्ता के लिए कॉलोनी बसाने की तैयारी हो रही हो।

आज नटकी गांव सिर्फ एक गांव नहीं, बल्कि गरीबों के दर्द, टूटे सपनों और सत्ता के खिलाफ उबलते आक्रोश की पहचान बन चुका है। गांव की टूटी दीवारें अब एक ही सवाल पूछ रही हैं —

“क्या गरीबों के सपनों की कोई कीमत नहीं होती?”

85 घरों की सपनों की कब्र के ऊपर बनेगा नया आशियाना इतिहास में जो लोगों को याद रहेगा

यह है छत्तीसगढ़ के फिल्म स्टार एक्टिंग के चलते जनता ने अपना बहुमूल वोट दिया लेकिन जनता के प्रति खलनायक का रोल कर दिए आम जनता ने इन्हें कई गंदी गाली और जीवन भर बद्दुआ और खुश नहीं रहने की बद्दुआ दी आम जनता का आक्रोश है नेताओं के ऊपर

नेता टिफ़िन करते और एक तरफ बुलडोजर चल रहा है

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