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देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज
लोकेशन केल्हारी थाना क्षेत्र
19 दिन बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे, क्या केल्हारी थाना ने कोरिया जिले की दर्दनाक घटना से नहीं लिया सबक?
रेत कारोबार से जुड़े विवाद में कोरिया जिले में तीन लोगों को जिंदा जलाए जाने के बाद भी सुस्त कार्रवाई, बिछियाटोला मामले में अब तक गिरफ्तारी नहीं — लोगों में डर, कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए
एमसीबी/केल्हारी।
केल्हारी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बिछियाटोला में कथित अवैध रेत कारोबार, मारपीट, धमकी और मोबाइल छीनने के मामले में आज दिनांक 30 जून तक लगभग 19 दिन बीत जाने के बाद भी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होना पुलिस प्रशासन और कानून व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
पीड़ित कमल नयन तिवारी द्वारा दिए गए आवेदन और बाद में दर्ज एफआईआर के बावजूद अब तक न आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, न कोई बड़ी कार्रवाई सामने आई। ऐसे में क्षेत्र की जनता पूछ रही है कि आखिर कानून किसके लिए है और पुलिस आखिर किसका इंतजार कर रही है?
पीड़ित द्वारा दिए गए आवेदन में आरोप लगाया गया था कि 29 मई 2026 की शाम ग्राम बिछियाटोला के पास नदी क्षेत्र में कथित अवैध रेत खनन का वीडियो बनाते समय उनके साथ मारपीट की गई, मोबाइल छीना गया, जान से मारने की धमकी दी गई और मोबाइल में मौजूद जरूरी फोटो व वीडियो डिलीट कर दिए गए।
पीड़ित पक्ष के अनुसार शिकायत के बाद भी तत्काल रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई और मोबाइल कई दिनों तक थाना में रखा गया। बाद में जब मामला उच्च अधिकारियों और मीडिया तक पहुंचा तब जाकर एफआईआर दर्ज हुई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सरगुजा रेंज के आईजी के हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई और 14 जून 2026 को केल्हारी थाना में अपराध क्रमांक 44/2026 दर्ज किया गया। इस मामले में ऋषभ तिवारी, राकेश तिवारी, रिंकू तिवारी, अभिषेक मिश्रा एवं ठेकेदार अभिषेक तिवारी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
बताया जा रहा है कि उक्त आरोपियों द्वारा न्यायालय में दायर अग्रिम जमानत याचिका 22 जून 2026 को न्यायालय द्वारा खारिज कर दी गई। इसके बावजूद क्षेत्र में आरोपियों के खुलेआम घूमने की चर्चाएं लगातार बनी हुई हैं। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि पुलिस प्रशासन द्वारा नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब न्यायालय से अग्रिम जमानत नहीं मिली, तब भी गिरफ्तारी नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। लोगों के बीच यह चर्चा है कि आखिर पुलिस कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है।
सूत्रों के अनुसार मामले में कुछ ऐसे बिंदु भी सामने आ रहे हैं जिनकी निष्पक्ष जांच जरूरी मानी जा रही है। क्षेत्र में चर्चा है कि जिन लोगों के नाम एफआईआर में दर्ज किए गए, उनमें से कुछ लोग कथित तौर पर घटना के समय क्षेत्र में मौजूद नहीं थे। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि पुलिस मोबाइल लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच करे ताकि सच्चाई सामने आ सके।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ग्राम बिछियाटोला में चल रहे कथित रेत कारोबार और पूरे मामले को प्रमुखता से हमारे करंट इलेक्ट्रॉनिक समाचार एवं प्रिंट मीडिया द्वारा लगातार उठाया गया। खबरें प्रकाशित और प्रसारित होने के बाद ही प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ी और शिकायत दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू हुई।
इसी बीच पहले मामले में एफआईआर दर्ज होने के तीन दिन बाद, 17 जून 2026 को खदान संचालक ऋषि कुमार गुप्ता की शिकायत पर कमल नयन तिवारी और लक्ष्मीकांत तिवारी के विरुद्ध भी बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत दूसरी एफआईआर दर्ज की गई।
शिकायत में स्वयं को पत्रकार बताकर धन की मांग करने, मांग पूरी नहीं होने पर खदान बंद कराने, झूठी शिकायतें करने, सोशल मीडिया एवं समाचार माध्यमों में बदनाम करने तथा कर्मचारियों को विभिन्न मामलों में फंसाने की धमकी देने के आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को व्हाट्सएप संदेश, क्यूआर कोड एवं अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही गई है। हालांकि इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय विवेचना और न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगा।
लेकिन इस दूसरी एफआईआर को लेकर भी क्षेत्र में कई तरह की चर्चाएं हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार यह सवाल उठ रहे हैं कि यदि शिकायतकर्ता के अनुसार जनवरी, फरवरी और मई 2026 से कथित रूप से धन की मांग की जा रही थी, तो शिकायत तत्काल क्यों नहीं की गई? दूसरी एफआईआर उसी समय क्यों सामने आई जब पहले मामले में आरोपियों के विरुद्ध केस दर्ज हो चुका था? हालांकि इन सभी बिंदुओं की पुष्टि निष्पक्ष जांच के बाद ही हो सकेगी।
क्षेत्र में यह चर्चा और तेज हो गई है कि कहीं पहले मामले के फरियादी के विरुद्ध दर्ज दूसरी एफआईआर का उद्देश्य मूल प्रकरण को प्रभावित करना तो नहीं था। हालांकि इसका कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
वर्तमान स्थिति को लेकर बताया जा रहा है कि क्षेत्र में रेत कारोबार फिलहाल लगभग बंद पड़ा है और माहौल शांत दिखाई दे रहा है, लेकिन न्याय और कानून व्यवस्था को लेकर अभी भी कई गंभीर सवाल बने हुए हैं। जनता का कहना है कि यदि मीडिया मामला नहीं उठाता तो शायद कार्रवाई भी नहीं होती।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल कानून और न्याय व्यवस्था को लेकर भी उठ रहा है। सामान्यतः कानून व्यवस्था में यह माना जाता है कि यदि कोई पक्ष सबसे पहले थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराता है, तो उसके पक्ष को प्रारंभिक रूप से गंभीर मानते हुए तत्काल कार्रवाई की जाती है। लेकिन इस मामले में पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उनकी शिकायत पर तत्काल कठोर कार्रवाई करने के बजाय मामले को लंबे समय तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
हालांकि यदि किसी भी पक्ष पर कोई आरोप हैं तो कानून सबके लिए समान होना चाहिए और निष्पक्ष जांच दोनों पक्षों की होनी चाहिए। यदि पीड़ित पक्ष पर भी किसी प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उन बिंदुओं की भी पारदर्शी जांच होनी चाहिए। लेकिन जनता का कहना है कि सबसे पहले दर्ज शिकायत और गंभीर आरोपों पर प्राथमिक कार्रवाई तथा गिरफ्तारी अब तक नहीं होना न्याय व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े करता है।
क्षेत्र में यह भी जन चर्चा का विषय बना हुआ है कि हाल ही में कोरिया जिले के बैकुंठपुर क्षेत्र में रेत कारोबार से जुड़े विवाद में तीन लोगों को जिंदा जलाकर मार दिए जाने की दर्दनाक घटना सामने आई थी। वहां भी पारिवारिक संबंधों को लेकर चर्चाएं हुई थीं। अब इस मामले को लेकर भी गांव और आसपास के क्षेत्रों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि हमारा चैनल और समाचार पत्र इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता।
लेकिन लगातार सामने आ रही चर्चाओं और हालिया घटनाओं के कारण पीड़ित पक्ष और ग्रामीणों में भय का माहौल जरूर बना हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष कार्रवाई और गिरफ्तारी नहीं हुई, तो कहीं कोई बड़ा हादसा न हो जाए।
स्थानीय लोगों का मानना है कि कोरिया जिले की दर्दनाक घटना के बाद पुलिस प्रशासन को ऐसे मामलों में और अधिक सतर्कता, गंभीरता और तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति बनने से पहले ही कानून का भय कायम हो सके और आम जनता का विश्वास मजबूत बना रहे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर सख्त कार्रवाई, गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच होती है तो आम जनता का कानून और न्याय व्यवस्था पर विश्वास मजबूत होगा। लेकिन इतने दिनों बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे लोगों के मन में असुरक्षा और अविश्वास बढ़ता जा रहा है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि लंबे समय से नदी क्षेत्रों में रात के अंधेरे में पोकलेन मशीन, ट्रैक्टर और हाइवा के माध्यम से बड़े पैमाने पर रेत निकासी की जाती रही है। कई बार शिकायतें हुईं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में खनिज विभाग और पुलिस प्रशासन दोनों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार और मुख्यमंत्री द्वारा अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद सीमावर्ती क्षेत्रों में रेत कारोबार को लेकर लगातार विवाद सामने आना चिंताजनक माना जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
जब शिकायत, आवेदन, एफआईआर, मीडिया खुलासा और उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हो रही, तो आम जनता को न्याय आखिर कैसे मिलेगा?
क्या गरीब और कमजोर की आवाज दबाई जा रही है?
क्या रेत कारोबारियों को खुली छूट मिली हुई है?
और यदि भविष्य में कोई बड़ी घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
फिलहाल पूरा मामला जांच में बताया जा रहा है, लेकिन 19 दिन बाद भी अधूरी कार्रवाई ने केल्हारी थाना की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

कोरिया जिले क्षेत्र में तीन व्यक्ति को रेत से जुड़े मामले मे जिंदा जला देने के बावजूद भी रेत से जुड़े मामले रेट माफियाओं पर 18 दिन बीतने के बाद भी केल्हारी थाना न्याय व्यवस्था पर कानून पर कई सवाल खड़े कर दिए


जिला कोरिया के अंतर्गत तीन व्यक्तियों को रेट से जुड़े मामले में जिंदा जला दिया गया इसके बाद से लगातार रेत से जुड़े मामले पर. जिला प्रशासन और राज्य सरकार की कड़ी निगरानी के आदेश दिए गए हैं की रेट से जुड़े सारे मामले पर कड़ी कार्यवाही की जाए
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