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देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज

 

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ट्रिपल हत्याकांड के बाद भी चिरमिरी में अवैध लाल ईंट भट्टों पर खामोशी क्यों?

 

 

 

 

जब अवैध कब्जों पर चल सकता है बुलडोजर, तो करोड़ों के अवैध ईंट भट्टों और मिट्टी खनन पर कार्रवाई क्यों नहीं?

कोरिया जिले में खनिज कारोबार से जुड़े विवाद में तीन लोगों को जिंदा जलाकर मार दिए जाने की सनसनीखेज घटना के बाद पूरे प्रदेश में अवैध खनन और खनिज माफियाओं को लेकर माहौल गर्म है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कई जिलों में खनिज विभाग सक्रिय दिखाई दे रहा है, लेकिन चिरमिरी में आज भी अवैध लाल ईंट भट्टों, अवैध मिट्टी खनन और रेत कारोबार पर प्रशासनिक खामोशी कई बड़े सवाल खड़े कर रही है।

चिरमिरी में वर्षों से कथित रूप से करोड़ों का अवैध लाल ईंट भट्टा कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार शहर और आसपास के क्षेत्रों में 100 से ज्यादा लाल ईंट भट्टे संचालित हैं। जनचर्चा का विषय है कि इनमें से अधिकांश बिना वैध लीज और बिना अनुमति के चल रहे हैं। एक आरटीआई में भी कथित रूप से बड़ा खुलासा हुआ कि कई भट्टों के पास वैध दस्तावेज तक नहीं हैं।

इसके बावजूद खनिज विभाग, तहसील प्रशासन और एसडीएम स्तर पर कोई बड़ी और स्थायी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। कभी-कभार खानापूर्ति के तौर पर छोटे स्तर पर जुर्माना या कार्रवाई होती है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद वही कारोबार फिर पहले की तरह शुरू हो जाता है। लाखों-करोड़ों के इस कथित अवैध कारोबार पर हजारों का जुर्माना लगाकर कार्रवाई का दावा करना भी अब शहर में चर्चा का विषय बन चुका है।

सबसे गंभीर सवाल यह है कि आखिर चिरमिरी में ऐसा क्या है, जहां वर्षों से अवैध मिट्टी खनन, अवैध ईंट भट्टे और खनिज कारोबार चलने के बावजूद प्रशासनिक सख्ती दिखाई नहीं देती?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि ईंट भट्टा संचालकों द्वारा जगह-जगह मिट्टी कटाई कर जमीनों को खोखला किया जा रहा है। कई स्थानों पर बिना किसी वैध लीज के मिट्टी निकाली जा रही है। पहाड़ और जमीन का स्वरूप बदल रहा है, पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, लेकिन कार्रवाई शून्य नजर आती है।

शहर में यह भी जनचर्चा का विषय है कि पहले कांग्रेस शासनकाल में इन कारोबारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था और वर्तमान भाजपा शासनकाल में भी यह कारोबार उसी तरह फल-फूल रहा है। लोगों के बीच चर्चा है कि इन क्षेत्रों को राजनीतिक रूप से प्रभावशाली और बड़ा वोट बैंक माना जाता है, जिसके चलते प्रशासनिक अधिकारी सख्ती से बचते हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार कार्रवाई का अभाव और खुलेआम संचालित हो रहे कथित अवैध कारोबार कई गंभीर सवाल जरूर खड़े कर रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जब प्रदेशभर में अवैध कब्जों और अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है, तो फिर चिरमिरी में कथित रूप से अवैध रूप से संचालित लाल ईंट भट्टों पर बुलडोजर क्यों नहीं चल सकता?

कोरिया जिले में ट्रिपल हत्याकांड जैसी भयावह घटना सामने आने के बाद भी यदि प्रशासन और खनिज विभाग नहीं जागता, तो क्या भविष्य में चिरमिरी में भी किसी बड़ी दुर्घटना या आपराधिक घटना का इंतजार किया जा रहा है?

लोगों के बीच यह सवाल भी लगातार उठ रहा है कि आखिर खनिज विभाग की चुप्पी की वजह क्या है? क्या राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई नहीं होती, या फिर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं?

अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद चिरमिरी में वर्षों से चल रहे कथित अवैध लाल ईंट भट्टों, मिट्टी खनन और खनिज कारोबार पर कोई बड़ी कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी सिर्फ चर्चाओं और कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाएगा।

चिरमिरी में चल रहे अवैध. ईट भटटे और मिट्टी खनन

जिला एमसी बी के खनिज विभाग अधिकारी दयानंद तिग्गा

जब कोई शिकायत लिखित देगा तब यह कार्यवाही करेंगे और यह कहते हैं चिरमिरी में लगातार कार्यवाही होती है तो फिर जमीनी हकीकत पर क्यों नहीं दिखती लाखों के अवैध ईट भक्तों पर हजारों की कार्यवाही कभी कभार की जाती है

वार्ड क्रमांक 12 हल्दीबाड़ी बड़ी बाजार पहुंच मार्ग बंद मार्ग पर पूरा पहाड़ काटकर ईट. भटटो में खपा दिया गया मिट्टी हवा में लटकते पेड़ फिर भी अधिकारी के आंखों पर पट्टी बंधी हुई है वन पर्यावरण और प्राकृतिक के साथ खिलवाड़

संचालित चिरमिरी बड़ी बाजार में. ईट.भटटे

 

 

चिरमिरी अनुविभागीय कार्यालय के 100 मीटर पीछे चल रहे यह लाल ईट. भट्टू का कारोबार जमाने से ना तहसील की कार्यवाही ना एसडीएम की कार्रवाई. सबसे बड़ा सवाल क्या प्रशासनिक अधिकारी राजनीतिक दबाव पर नहीं करते हैं किसी प्रकार की कोई कार्यवाही जो जन चर्चा शहर में बना हुआ है शहर में चर्चा का विषय है

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