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MCB की खास खबर

देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज

 

 

गरीबों के निवाले पर सरकार और तंत्र का सीधा डाका: एमसीबी जिले में 4 महीने से चना गायब, ₹4.68 करोड़ के भारी गोलमाल पर प्रशासन मौन!

 

 

 

 

 

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी):

छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार में गरीबों के राशन पर भारी सेंधमारी और कालाबाजारी का काला खेल जोरों पर चल रहा है। जिले की शासकीय उचित मूल्य (PDS) दुकानों से पिछले 4 महीनों से गरीबों का हक यानी चना पूरी तरह गायब कर दिया गया है। पिछले 3 महीने का राशन एक साथ (अप्रैल, मई, जून का चावल) बांटा गया, जिसमें चावल तो मिला लेकिन उसके साथ ही दो महीने का चना पूरी तरह गोल कर दिया गया। इसके बाद वर्तमान जुलाई और अगस्त महीने का भी पूरा चना गायब कर दिया गया है, जिससे पिछले चार महीनों का कुल चना कोटे से पूरी तरह साफ हो चुका है। कई बार खबरें चलने के बावजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों और महकमों की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे साफ जाहिर है कि इनकी अनदेखी से यह काला कारोबार फल-फूल रहा है।

राशन दुकानों में नियमों की ऐसी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं कि पारदर्शिता का नामोनिशान नहीं है। नियम यह कहता है कि हर शासकीय उचित मूल्य दुकान के बाहर अनिवार्य रूप से सूचना या स्टॉक बोर्ड लगना चाहिए, जिसमें दुकान का समय, सेल्समैन व संचालक का नाम, वितरण सामग्री की लिस्ट, शुरुआती स्टॉक, आज का वितरण, अंतिम बचा हुआ स्टॉक और सामग्री की दर साफ-साफ लिखनी चाहिए। लेकिन दुकानदारों द्वारा जानबूझकर यह बोर्ड नहीं टांगे जाते ताकि सामग्री की कालाबाजारी खुलेआम की जा सके, स्टॉक छिपाकर राशन को खुले बाजार में बेचने की नीयत पूरी की जा सके और सामग्री खत्म होने का झूठा बहाना बनाया जा सके।

आंकड़ों के आईने में देखा जाए तो एमसीबी जिले में कुल वैध राशन पंजीकृत बीपीएल परिवार 1,16,826 हैं। पात्र परिवारों को प्रति कार्ड आमतौर पर 2 किलोग्राम चना दिया जाता है, लेकिन गरीबों को लगातार 4 महीने से चना नहीं मिला है। इस तरह कुल रोकी गई मात्रा 1,16,826 कार्ड गुणा 2 किलो गुणा 4 महीने यानी कुल 9,34,608 किलोग्राम यानी लगभग 9,346 क्विंटल चना होती है। यदि चने की बाजार दर या खरीदी लागत औसतन ₹50 प्रति किलो भी मानी जाए, तो सरकार और बिचौलियों के स्तर पर कुल बचत या घोटाला राशि 9,34,608 किलो गुणा ₹50 यानी लगभग ₹4 करोड़ 67 लाख 30 हजार 400 रुपये बनती है।

बाजार में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मिलने वाला राशन चना सबसे महंगे दामों पर बिकता है, जिस पर हर महीने या कुछ महीनों के अंतराल पर इस तरह गोलमाल करके गरीबों के हक पर डाका डाला जाता है। आम जनता के हित में छत्तीसगढ़ सरकार, राज्य सरकार या खाद्य मंत्री की ओर से कभी कोई बयान या जवाब सामने नहीं आता है, और यह गरीबों के साथ सबसे बड़ा घोटाला साबित हो रहा है, जहां गरीब जनता आखिर अपनी इस लाचारी की फरियाद लेकर कहां जाए।

 

एमसीबी जिला के शासकीय उचित मूल दुकानों में गरीबों को मिलने वाला पीडीएफ वितरण चना पिछले चार माह से विष्णु देव साइन सरकार ने गरीबों का हक अधिकार मार रही है बीते तीन माह एक साथ वितरण राशन में दो माह का चना अधिकार में कटौती कर दी गई जुलाई और अगस्त में भी गरीबी रेखा के पत्र कार्ड धारकों को मिलने वाला चना सबसे महंगी वितरण पीएफ सरकार ने गरीबो के अधिकारो,को बार-बार हर एक या दो महीने में राशन की दुकानों से चना गोल कर दिया जाता है

 

 

जुलाई अगस्त का चना गोल शासकीय उचित मूल दुकानों पर सबसे महंगी दर में बिकने वाला गरीबों को राहत देने वाला पीडीएफ वितरण चना को ही सरकार टारगेट बनती है या कोई नई बात नहीं है हमेशा से राशन की दुकानों में यह कालाबाजारी और लापरवाही दुकान संचालक और सरकार के द्वारा प्रत्येक कार्ड धारकों को मिलने वाला 2 किलो चना उनके अधिकार से गोल कर दिया जाता है ना तो इसमें खाद्य अधिकारी की कोई जांच ना अनुविभागी अधिकारी ना ही फूल इंस्पेक्टर वर्तमान में स्थिति यह है कि शक्कर के भाव बढ़ते ही राशन की दुकानों में शक्कर तक राशन कार्ड धारकों, को,राशन की दुकानों में नहीं मिल पा रही है शक्कर राशन कार्ड धारकों की लगातार शिकायत

प्रत्येक राशन की दुकानों पर ना तो किसी दुकान संचालक के नाम की लिस्ट रहती है ना ही सेल्समैन के नाम रहते हैं ना ही दुकान खोलने के समय सारणी रहती है नाही राशन कार्ड धारकों की संख्या रहती है प्रत्येक दुकान राशन क्रमांक पर कितने राशन कार्ड धारकों को राशन वितरण किया जाना है नहीं मिलने वाली पीडीएफ वितरण सामग्री की स्टॉक का विवरण दिया जाता है और बीच में स्टॉक खत्म होने पर किसी प्रकार की कोई सूचना वोट पर जानकारी नहीं दी जाती है क्योंकि इन्हें बाजार दर में कालाबाजारी करने के बहाने मिल जाते हैं जबकि नियम अनुसार खाद्य सूचना अधिकार के अंतर्गत नियम या कहता है कि प्रत्येक राशन की दुकानों पर मिलने वाले वितरण पीएफ की पूरी जानकारी की लिस्ट नाम सूचना जानकारी उपलब्ध बाहर टागी जाए मगर इस पर किसी प्रकार का जिला खाद्य अधिकारी के द्वारा दुकानों पर किसी प्रकार का निर्देश देखने को नहीं मिलता

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