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देवेंद्र सिंह चंदेल भारत कीआवाज
लोकेशन चिरमिरी
।100 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर का नवनिर्माण पूर्ण, स्थापना-रुद्राभिषेक व भोग-भंडारे में उमड़ा जनसैलाब;
सेंट्रल बैंक की ओर से नए मार्ग की उम्मीद
हल्दीबाड़ी पाराशर रोड, वार्ड क्रमांक 12। लगभग 100 वर्ष पुराने प्राचीन भगवान भोलेनाथ जी के शिव मंदिर का नवनिर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ मंदिर की स्थापना, रुद्राभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। सुबह 9 बजे से शुरू हुआ धार्मिक आयोजन शाम 6 बजे तक चला। इस दौरान भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक, पूजा-अर्चना एवं विशाल भोग-भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में वार्डवासी, श्रद्धालु एवं स्थानीय नागरिक शामिल हुए।
मंदिर के नवनिर्माण एवं स्थापना के महत्वपूर्ण कार्य में वार्ड क्रमांक 12 की पूर्व पार्षद श्रीमती पाराशर स्थापक एवं उनके पति श्री लक्की स्थापक पाराशर के अथक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों के द्वारा मंदिर निर्माण को लेकर लगातार प्रयास करते हुए दिन-रात एक कर मेहनत, सहयोग और सक्रिय प्रयास किए गए, जिसके परिणामस्वरूप वर्षों पुराने इस प्राचीन मंदिर को नया स्वरूप मिल सका। आज विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की स्थापना, रुद्राभिषेक एवं पूजा-अर्चना के साथ मंदिर क्षेत्रवासियों के लिए नए स्वरूप में समर्पित हुआ।
सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। सुबह 9 बजे विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं स्थापना कार्यक्रम शुरू हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक किया गया। इसके बाद भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ और श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की भक्ति में लीन नजर आए।
शाम 6 बजे तक मंदिर में पूजा-अर्चना एवं दर्शन का सिलसिला चलता रहा। इसके बाद विशाल भोग-भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, वार्डवासियों एवं स्थानीय नागरिकों को प्रसाद ग्रहण कराया गया। पूरे क्षेत्र में दिनभर धार्मिक एवं भक्तिमय वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर महापौर श्री रामनरेश राय, कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्री अशोक श्रीवास्तव, नगर निगम के श्री संतोष सिंह, श्रीमती गायत्री बिरहा, नगर निगम इंजीनियर विक्टर सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक मंदिर पहुंचे। सभी ने भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।
आस्था और सनातन धर्म का प्रतीक बना प्राचीन मंदिर
भगवान भोलेनाथ का यह प्राचीन मंदिर क्षेत्रवासियों की वर्षों पुरानी आस्था का केंद्र रहा है। स्थानीय लोगों के बीच मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना पूरी होती है। वर्षों से श्रद्धालु यहां भगवान भोलेनाथ के चरणों में अपनी मुरादें लेकर पहुंचते रहे हैं।
मंदिर के नवनिर्माण के बाद श्रद्धालुओं में और उत्साह दिखाई दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान भोलेनाथ के चरणों में सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी हो, यही आस्था इस मंदिर को क्षेत्र के लिए विशेष बनाती है।
अब मंदिर का नया स्वरूप न केवल वार्ड क्रमांक 12 की धार्मिक आस्था को मजबूती देगा, बल्कि यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी आने वाले समय में बढ़ने की उम्मीद है।
विशाल मंदिर के सामने संकरा रास्ता बनी सबसे बड़ी चुनौती
मंदिर का भव्य नवनिर्माण तो हो गया, लेकिन मंदिर तक पहुंचने वाला वर्तमान मार्ग आज भी स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
मुख्य गली मार्ग लगभग दो फीट के आसपास ही संकरा है। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर एक साथ दो व्यक्तियों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। बड़े सामान को निकालना तो और भी कठिन है। गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाना, किसी बुजुर्ग या दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को बाहर निकालना अथवा मृत्यु होने पर शव को घर से बाहर ले जाना तक स्थानीय परिवारों के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है।
वाहनों की स्थिति तो और भी कठिन है। एक वाहन किसी तरह रास्ते में खड़ा हो जाए तो दूसरे वाहन के लिए रास्ता छोड़ना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों से उन्हें इसी समस्या के बीच जीवन गुजारना पड़ रहा है।
हालांकि लगातार उठाई गई मांग के बाद पिछले कुछ वर्षों में मार्ग में थोड़ा सुधार हुआ और आवागमन की स्थिति में कुछ राहत मिली, लेकिन आज भी यह रास्ता पूरी तरह आने-जाने योग्य और सुविधाजनक नहीं बन पाया है। गंभीर परिस्थितियों में स्थानीय लोगों की परेशानी अभी भी बरकरार है।
जिस गली में सामान्य आवागमन मुश्किल, उसी में आज उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
मंदिर स्थापना के अवसर पर आज बड़ी संख्या में श्रद्धालु, वार्डवासी और जनप्रतिनिधि इसी संकरी गली से होकर मंदिर पहुंचे।
भाजपा-कांग्रेस सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों एवं स्थानीय नागरिकों ने मौके पर स्वयं इस लगभग दो फीट के मार्ग से होकर आवागमन किया और महसूस किया कि वास्तव में यह रास्ता कितना संकरा है तथा यहां रहने वाले स्थानीय परिवार किस तरह की परेशानियों से गुजरते हैं।
मौके पर रास्ते की समस्या को लेकर चर्चाएं भी हुईं। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने संकरे मार्ग की स्थिति को करीब से देखा और इस बात को महसूस किया कि इतने बड़े और भव्य मंदिर के सामने श्रद्धालुओं एवं स्थानीय निवासियों के लिए सुगम मार्ग होना कितना आवश्यक है।
जिस गली में सामान्य दिनों में लोगों का आना-जाना तक मुश्किल था, उसी गली में आज भगवान भोलेनाथ की स्थापना के अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ दिखाई दी। इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि आने वाले समय में मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही और बढ़ने वाली है और ऐसे में बेहतर मार्ग की जरूरत और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
लगभग 10 वर्षों से रास्ते की समस्या को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे देवेंद्र सिंह चंदेल राजपूत
इस मार्ग की समस्या को लेकर स्थानीय निवासी देवेंद्र सिंह चंदेल राजपूत पिछले लगभग 10 वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार यह लड़ाई किसी व्यक्ति या संस्था के विरोध में नहीं, बल्कि स्थानीय निवासियों की मूलभूत सुविधा, सुरक्षा और सम्मानजनक आवागमन के लिए है।
उन्होंने इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार एवं नगर निगम प्रशासन तक लगातार आवेदन और मांग पहुंचाई।
इस लंबे संघर्ष के दौरान अधिकारी बदलते रहे। उनके अनुसार करीब आठ कलेक्टरों के तबादले हुए, कई एसडीएम बदले और कई तहसीलदार बदले, लेकिन रास्ते की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई।
अधिकारी आते रहे, जाते रहे, लेकिन स्थानीय लोगों की समस्या वहीं बनी रही और देवेंद्र सिंह चंदेल राजपूत की मांग भी लगातार जारी रही।
उनके अनुसार वर्ष 2014 में जब स्थानीय मंत्री जी पहली बार विधायक बने थे, तब भी उनके सामने इस रास्ते की समस्या रखी गई थी और उनके द्वारा लगातार प्रयास भी किया गया था गए थे। इसके बाद भी अलग-अलग समय पर प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों के सामने यह मुद्दा लगातार उठाया जाता रहा।
संघर्ष यहां तक पहुंचा कि आत्मदाह की चेतावनी तक देनी पड़ी
देवेंद्र सिंह चंदेल राजपूत के अनुसार रास्ते की समस्या को लेकर उन्होंने कई बार जिला प्रशासन के सामने गंभीरता से अपनी बात रखी। जिला कोरिया कलेक्टर के समक्ष भी तीन बार इस समस्या को प्रमुखता से रखा गया।
लंबे समय तक समाधान नहीं होने के कारण संघर्ष की स्थिति कई बार बेहद गंभीर हो गई। उन्होंने बताया कि दो बार आत्मदाह करने तक की चेतावनी देने की स्थिति बनी और पुलिस की ओर से उन्हें नोटिस भी मिला।
उनका कहना है कि यह किसी व्यक्ति को धमकाने के उद्देश्य से नहीं था, बल्कि वर्षों से स्थानीय लोगों की पीड़ा का समाधान नहीं होने पर प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित करने के लिए उठाया गया बेहद कठोर कदम था।
इस पूरी लड़ाई में अधिकारी बदलते गए, आवेदन आगे बढ़ते रहे, मुलाकातें होती रहीं, लेकिन देवेंद्र सिंह चंदेल राजपूत का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे को छोड़ना स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उनके सामने उन स्थानीय परिवारों की परेशानी थी जिन्हें बीमारी, दुर्घटना, मृत्यु और बड़े सामान के आवागमन में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
तीन लोगों की मृत्यु के बाद शव तक निकालने में हुई परेशानी
इस रास्ते की पीड़ा केवल आने-जाने की समस्या नहीं है। देवेंद्र सिंह चंदेल राजपूत के अनुसार तीन लोगों की मृत्यु के बाद शव तक इस संकरे रास्ते से बाहर निकालने में गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा।
गंभीर मरीज को अस्पताल ले जाने से लेकर बड़े सामान को घर तक पहुंचाने तक हर स्थिति में स्थानीय परिवारों को रास्ते की संकराई का सामना करना पड़ता है।
उनके अनुसार यदि किसी परिवार में कोई व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो जाए तो उसे अस्पताल तक पहुंचाने में चुनौती आती है। किसी परिवार में मृत्यु होने पर शव को बाहर निकालने में कठिनाई होती है। बड़े सामान को घर तक लाना भी आसान नहीं है।
यही वह दर्द है जिसे लेकर वर्षों से स्थानीय लोगों के लिए एक बेहतर और चौड़े मार्ग की मांग उठाई जाती रही है।
सेंट्रल बैंक के पास से नए मार्ग की उम्मीद, स्थानीय लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
अब मंदिर के नवनिर्माण के साथ वर्षों पुरानी रास्ते की समस्या के समाधान की एक नई उम्मीद जगी है।
सेंट्रल बैंक के पास से पीछे की ओर नया और चौड़ा मार्ग मंदिर तथा स्थानीय बस्ती से जोड़ने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस मार्ग के लिए वार्ड क्रमांक 12 की पूर्व पार्षद श्रीमती पाराशर स्थापक एवं श्री लक्की स्थापक पाराशर की ओर से मांग एवं प्रस्ताव रखा गया है। महापौर एवं नगर निगम प्रशासन की ओर से भी इस दिशा में प्रस्ताव आगे बढ़ाया गया है।
वहीं स्थानीय निवासी देवेंद्र सिंह चंदेल राजपूत ने भी मंत्री जी से मुलाकात कर इस मार्ग की मांग रखी है। कलेक्टर एवं नगर निगम आयुक्त के समक्ष भी लगातार समस्या रखी गई है। मंत्री जी, महापौर एवं नगर निगम आयुक्त की ओर से जल्द मार्ग उपलब्ध कराने का आश्वासन मिलने की बात कही गई है।
यदि सेंट्रल बैंक की ओर से प्रस्तावित यह मार्ग बनता है तो मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
दो फीट की संकरी गली से बड़े सामान, गंभीर मरीज अथवा शव को निकालने की वर्षों पुरानी मजबूरी से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
मंदिर के नवनिर्माण के साथ अब सुगम मार्ग की उम्मीद
लगभग 100 वर्ष पुराने प्राचीन मंदिर का नवनिर्माण पूर्ण हो चुका है। भगवान भोलेनाथ की विधि-विधान से स्थापना, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और विशाल भोग-भंडारा संपन्न हो चुका है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए और अपनी मनोकामनाएं उनके चरणों में रखीं।
आज का दिन क्षेत्र के लिए केवल मंदिर के नवनिर्माण और धार्मिक आयोजन का अवसर नहीं रहा, बल्कि वर्षों पुरानी रास्ते की समस्या को भी सामने लाने वाला अवसर बना।
एक ओर विशाल मंदिर आस्था और सनातन धर्म के प्रतीक के रूप में नए स्वरूप में तैयार हुआ है, वहीं दूसरी ओर अब उम्मीद है कि सेंट्रल बैंक की ओर से प्रस्तावित नया मार्ग इस मंदिर और स्थानीय बस्ती को बेहतर एवं सुगम आवागमन से जोड़ेगा।
आने वाले समय में यदि यह मार्ग तैयार होता है तो मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को भी सुविधा मिलेगी और वर्षों से संकरी गली की परेशानी झेल रहे स्थानीय परिवारों को भी बड़ी राहत मिलेगी।
भोलेनाथ का मंदिर नवनिर्मित हो चुका है, अब स्थानीय निवासियों की नजर उस नए मार्ग पर है—जो केवल मंदिर तक पहुंचने का रास्ता नहीं, बल्कि वर्षों की परेशानी से राहत का रास्ता भी साबित हो सकता है।
हर हर महादेव।


प्राचीन मंदिर 100 वर्ष पुराना नवनिर्माण स्वरूप


पूर्व स्थापक वार्ड पार्षद और लककी स्थापक जी के द्वारा रुद्राभिषेक पूजा अर्चना की गई साथ ही बड़ी संख्या में भक्तों ने अभी पूजा अर्चनाकी


भोग भंडारा भी दिन भर बैठ के खिलाया गया

मंदिर आने-जाने का मुख मार्ग यह है जिसमें सिर्फ दो फीट चौड़ा मार्ग है जिसमें पहले से ही आने-जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और अब बड़ी संख्या में भक्ति श्रद्धा आस्था के साथ भक्त यहां आएंगे पूजा अर्चना करने जिसमें इस 2 फीट मार्ग से ही मंदिर का मुख मार्ग से गुजर कर जाना पड़ेगा हालांकि वार्ड पार्षद के द्वारा सेंट्रल बैंक की ओर से मार्ग निर्माण की मांग नगर निगम से की गई है जो जल्द मंदिर आता गवन जाने के लिए मार्ग और स्थानीय निवासियों की वर्षों पुरानी मांग भी पूरी होने की संभावना, है
हल्दीबाड़ी सेंट्रल बैंक के पीछे से मंदिर आने जाने का मार्ग और स्थानीय निवासियों की वर्षों पुरानी मांग मार्ग निर्माण के बाद पुरी की जाने की हो सकेगी
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