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MCB की खबर

देवेंद्र सिंह चंदेल भारत कीआवाज

लोकेशन चिरमिरी

 

 

किसके इशारे पर हल्दीबाड़ी के मुख्य मार्ग पर पहुंची जेसीबी? और बिना नोटिस बिना जानकारी के करण जींस कॉर्नर में लगे नाले पर जली को जेसीबी से सुबह 8:15 बजे उखाड़ कर हटाया गया

 

 

 

 

कोई नोटिस, न सूचना… करण जींस कॉर्नर के सामने आंखों के सामने उखाड़ दी नाले की जाली, 9 बजे व्यापार जगत ने घेर लिया मामला—इंजीनियर विक्टर वर्मा से सवालों की बौछार

“मुझे कुछ नहीं बताया गया, सुबह 8:15 बजे जेसीबी पहुंची और निकलते तक सब कुछ तोड़ दिया गया”—व्यापार संघ के नवनियुक्त उपाध्यक्ष एवं करण जींस कॉर्नर के संचालक रवि सोपति का आरोप

पड़ोसी व्यापारी को पहले से थी जानकारी? सामने खड़े होकर बनाते रहे वीडियो, लेकिन जिम्मेदार पड़ोसी और व्यापारी होने के बावजूद नहीं दी सूचना—रवि सोपति ने उठाए सवाल

 

चिरमिरी। हल्दीबाड़ी मुख्य मार्ग स्थित करण जींस कॉर्नर के सामने नाले में लगी जाली को जेसीबी से हटाए जाने के बाद सोमवार को बड़ा विवाद खड़ा हो गया। नगर निगम की कार्रवाई के बाद व्यापारियों में भारी आक्रोश फैल गया और सुबह करीब 9 बजे व्यापार संघ के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में व्यापारी मुख्य मार्ग पर एकत्रित हो गए।

मामला केवल एक नाले की जाली हटाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बिना पूर्व सूचना कार्रवाई, नोटिस की प्रक्रिया, इंजीनियर द्वारा स्पष्ट जवाब नहीं दिए जाने और जाली हटने के बाद आम जनता की सुरक्षा जैसे गंभीर सवालों ने पूरे मामले को चर्चा का विषय बना दिया।

व्यापार संघ के नवनियुक्त उपाध्यक्ष एवं करण जींस कॉर्नर के संचालक रवि सोपति ने बताया कि उन्हें इस कार्रवाई के संबंध में न कोई नोटिस दिया गया, न कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही व्यापार संघ को इसकी जानकारी दी गई।

सुबह 8:15 बजे पहुंची जेसीबी, आंखों के सामने तोड़ दी गई जाली

रवि सोपति के अनुसार, 1 सितंबर की सुबह करीब 8:15 बजे उन्हें घर के सदस्यों ने जानकारी दी कि दुकान के सामने जेसीबी पहुंच गई है।

उन्होंने बताया कि जब तक वह मौके पर निकलकर पहुंचे, तब तक नगर निगम के इंजीनियर विक्टर वर्मा की मौजूदगी में जेसीबी से नाले में लगी जाली को तोड़कर निकाला जा चुका था।

रवि सोपति ने कहा कि यह कार्रवाई उनकी आंखों के सामने हुई और उन्होंने मौके पर इंजीनियर विक्टर वर्मा से सवाल किया कि—

“बिना नोटिस और बिना किसी सूचना के आखिर यह कार्रवाई क्यों की जा रही है?”

उनका आरोप है कि इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने के बजाय इंजीनियर जवाबों से बचते नजर आए।

पड़ोसी व्यापारी को सब पता था? सामने खड़े होकर बनाते रहे वीडियो

इस पूरे मामले में रवि सोपति ने अपने पड़ोसी व्यापारियों भारतेस जैन और अभिनव पटिहार को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

रवि सोपति का कहना है कि दोनों उनके पड़ोसी होने के साथ-साथ व्यापारी भी हैं और उन्हें कार्रवाई की पहले से जानकारी थी। उनके अनुसार, कार्रवाई के दौरान दोनों मौके पर मौजूद थे और सामने खड़े होकर पूरी घटना का वीडियो बना रहे थे।

रवि सोपति ने सवाल उठाया कि यदि उन्हें कार्रवाई की पहले से जानकारी थी तो आखिर—

एक जिम्मेदार पड़ोसी और व्यापारी होने के नाते संबंधित दुकानदार को इसकी सूचना देना जरूरी क्यों नहीं समझा गया?

उन्होंने कहा कि व्यापारिक क्षेत्र में पड़ोसी की दुकान के सामने जेसीबी से कार्रवाई हो रही हो और किसी व्यक्ति को उसकी पहले से जानकारी हो, तो केवल सामने खड़े होकर वीडियो बनाना ही जिम्मेदारी नहीं हो सकती।

सवाल यह है कि व्यापार संघ के उपाध्यक्ष और संबंधित दुकानदार को कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन रवि सोपति के आरोप के अनुसार पड़ोसी व्यापारियों को कार्रवाई की जानकारी पहले से कैसे थी?

और यदि जानकारी थी तो पड़ोसी होने के नाते उन्हें बताया क्यों नहीं गया?

यही सवाल अब हल्दीबाड़ी के व्यापारिक क्षेत्र में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है।

सुबह 9 बजे व्यापार जगत हुआ एकजुट, जमकर हुआ विरोध

कार्रवाई की जानकारी फैलते ही सुबह करीब 9 बजे हल्दीबाड़ी मुख्य मार्ग पर व्यापार संघ के पदाधिकारी और व्यापारी बड़ी संख्या में एकत्रित हो गए।

व्यापारियों ने नगर निगम की कार्रवाई का जोरदार विरोध किया और इंजीनियर विक्टर वर्मा को मौके पर बुलाकर जवाब देने की मांग की।

इस दौरान मुख्य मार्ग पर भारी भीड़ जमा हो गई और कुछ समय के लिए जाम जैसी स्थिति भी बन गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मौके पर महापौर, तहसीलदार, थाना प्रभारी, नगर निगम प्रशासन के अधिकारी सहित अन्य लोग पहुंचे। कांग्रेस और भाजपा से जुड़े कई जनप्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद रहे।

इंजीनियर विक्टर वर्मा से सवालों की बौछार, कई सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं

व्यापारियों के विरोध के बाद इंजीनियर विक्टर वर्मा के पहुंचने पर उनसे लगातार सवाल किए गए।

मीडिया और व्यापारियों ने पूछा—

बिना पूर्व सूचना कार्रवाई क्यों की गई?

किसके आदेश पर जेसीबी भेजी गई?

संबंधित दुकानदार को जानकारी क्यों नहीं दी गई?

व्यापार संघ को कार्रवाई से पहले क्यों नहीं बताया गया?

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, मीडिया के कुछ सवालों का जवाब दिया गया, लेकिन कई महत्वपूर्ण सवालों पर स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आ सकी।

व्यापारियों का आरोप रहा कि इंजीनियर कई सवालों के सीधे जवाब देने से बचते नजर आए।

महापौर ने भी पूछा—हमें जानकारी क्यों नहीं दी?

मौके पर पहुंचे महापौर ने भी इंजीनियर विक्टर वर्मा से कार्रवाई को लेकर सवाल किए।

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, महापौर ने इंजीनियर से पूछा कि इतनी बड़ी कार्रवाई की जानकारी पहले क्यों नहीं दी गई और उन्हें इस संबंध में क्यों नहीं बताया गया?

लेकिन पूरे घटनाक्रम को लेकर ऐसा कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया, जिससे कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया और आदेश की स्थिति साफ हो सके।

नियम क्या कहते हैं? नोटिस, सुनवाई और उचित प्रक्रिया का सवाल

इस मामले में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर खड़ा हो रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने 13 नवंबर 2024 को संपत्ति और निर्माण ध्वस्तीकरण से जुड़े मामलों में देशभर के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सामान्य परिस्थितियों में अदालत ने कहा है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से पहले कारण बताओ नोटिस, संबंधित व्यक्ति को जवाब देने का अवसर और सुनवाई जैसी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। अंतिम आदेश के बाद भी प्रभावित पक्ष को नियमानुसार चुनौती देने का अवसर मिलना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों में सामान्य रूप से यह भी कहा गया है कि नोटिस में कथित उल्लंघन और कार्रवाई का आधार स्पष्ट होना चाहिए तथा संबंधित व्यक्ति को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाना चाहिए।

हालांकि महत्वपूर्ण बात यह भी है कि सार्वजनिक सड़क, स्ट्रीट, फुटपाथ, नदी या जलाशय जैसी सार्वजनिक जगहों पर स्थित अनधिकृत संरचनाओं के मामलों में ये सामान्य दिशा-निर्देश उसी रूप में लागू नहीं हो सकते और स्थानीय नगर निगम कानून व परिस्थितियां अलग प्रक्रिया निर्धारित कर सकते हैं।

ऐसे में हल्दीबाड़ी के मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि—

नगर निगम ने नाले की उक्त जाली को किस कानूनी प्रावधान, आदेश और प्रक्रिया के तहत हटाया?

यदि इसे सार्वजनिक नाले पर अनधिकृत संरचना मानकर हटाया गया, तो प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि कार्रवाई का आधार क्या था।

और यदि संबंधित व्यापारी का दावा सही है कि उसे कोई सूचना या नोटिस नहीं दिया गया, तो फिर पूरी कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

तहसीलदार, थाना प्रभारी और प्रशासन के सामने उठा प्रक्रिया का सवाल

मौके पर तहसीलदार और थाना प्रभारी सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

व्यापारियों और मीडिया द्वारा लगातार यह सवाल उठाया गया कि किसी संरचना को हटाने से पहले संबंधित व्यक्ति को सूचना देने और नियमानुसार कार्रवाई करने की प्रक्रिया क्या अपनाई गई।

पूरा व्यापार जगत और प्रशासन मुख्य मार्ग पर मौजूद था, लेकिन कार्रवाई को लेकर उठे कई सवालों का मौके पर स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।

पहले भी मनमानी के आरोपों की चर्चा

स्थानीय व्यापारियों के बीच यह चर्चा भी रही कि इंजीनियर विक्टर वर्मा पर पहले भी मनमाने तरीके से कार्रवाई करने के आरोप लगाए जाते रहे हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है और इन्हें संबंधित पक्ष के जवाब के साथ देखा जाना चाहिए, लेकिन हल्दीबाड़ी की इस कार्रवाई के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर सवाल जरूर खड़े हुए हैं।

जाली हटते ही राहगीरों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा

इस पूरे विवाद के बीच अब सबसे गंभीर सवाल आम जनता की सुरक्षा को लेकर खड़ा हो गया है।

नाले की जाली हटाए जाने के बाद राहगीरों और आम नागरिकों को असुरक्षित महसूस होने की बात सामने आ रही है।

शहर में लगातार बारिश हो रही है और कई बार 24 घंटे तक बारिश का दौर जारी रहता है। मूसलाधार बारिश के दौरान मुख्य मार्ग का पानी तेज बहाव के साथ नाले की ओर जाता है।

ऐसे में सुरक्षा जाली हटने के बाद—

यदि कोई बच्चा, राहगीर या आम नागरिक तेज बारिश और पानी के बहाव के दौरान खुले नाले में गिर जाता है तो क्या होगा?

यदि कोई बड़ा हादसा या जनहानि होती है तो आखिर जिम्मेदार कौन होगा?

नगर निगम प्रशासन?

कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारी?

महापौर?

या फिर आम जनता को ही अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्वयं उठानी पड़ेगी?

मुख्य मार्ग पर खुले नाले और लगातार मूसलाधार बारिश के बीच यह स्थिति लोगों के लिए खतरे की घंटी बन सकती है।

लोगों का कहना है कि यदि जाली हटाना आवश्यक था तो उसके बाद राहगीरों की सुरक्षा के लिए तत्काल कोई वैकल्पिक सुरक्षा व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

सबसे बड़ा सवाल—आखिर किसके आदेश पर चली जेसीबी?

हल्दीबाड़ी के इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—

✔ कार्रवाई का आदेश किसने दिया?

✔ जेसीबी किसके निर्देश पर भेजी गई?

✔ संबंधित व्यापारी को पहले से सूचना क्यों नहीं दी गई?

✔ व्यापार संघ को कार्रवाई की जानकारी क्यों नहीं दी गई?

✔ रवि सोपति के आरोप के अनुसार पड़ोसी व्यापारियों को पहले से जानकारी कैसे थी?

✔ यदि जानकारी थी तो पड़ोसी और व्यापारी होने के नाते सूचना क्यों नहीं दी गई?

✔ कार्रवाई किस कानूनी प्रावधान और प्रक्रिया के तहत की गई?

✔ जाली हटने के बाद खुले नाले से होने वाली संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी किसकी होगी?

हल्दीबाड़ी में अब सवाल केवल जाली हटाने का नहीं है… सवाल नगर निगम की कार्रवाई की प्रक्रिया, जवाबदेही और आम जनता की सुरक्षा का है।

आज नाले की जाली हटी है… लेकिन अगर कल मूसलाधार बारिश में कोई राहगीर खुले नाले में गिर गया, तो आखिर जवाब कौन देगा?

सुबह 1 सितंबर सुबह 8:15 नगर निगम इंजीनियर विक्टर के द्वारा करण जींस कॉर्नर के सामने नाले में लगी जाली को बिना नोटिस बिना जानकारी के जेसीबी से उखाड़ केहटाया गया

स्थानीय व्यापारियों ने जमकर नगर निगम प्रशासन के खिलाफ हाय-हाय और विक्टर वर्मा के खिलाफ नारा लगाते हुए जमकर विरोध प्रदर्शन किया बड़ी संख्या में व्यापार संघ ने मिलकर विरोध किया

सुबह 8:15 स्थानीय निवासी और व्यापार संघ के उपाध्यक्ष रवि सोपति करण जींस कॉर्नर के मालिक के द्वारा सुबह विक्टर वर्मा से पूछा गया बिना नोटिस और अन लीगल तरीके से आप कैसे इस जाली को तोड़ रहे हैं सवालों के जवाब से बचते हुए स्कूटी में भागते नजर आए नगर निगम के इंजीनियर विक्टर वर्मा

व्यापार संघ के नए उपाध्यक्ष रवि सोपति करण जींस कॉर्नर के मलिक के द्वारा मीडिया को बताया गया कि ना मुझे इसकी कोई नोटिस या सूचना जानकारी दी गई और जल्दबाजी में किसके कहने से यह कार्रवाई की गई जो संविधान के खिलाफ और नियम के विरुद्ध यह किया गया है मेरे दुकान की जली को तोड़ा गया है कल बिना नोटिस जारी किए किसी का घर गिरा दिया जाएगा नगर निगम प्रशासन और यह विक्टर इंजीनियर क द्वारा जो मनमानी और अनलीगल तरीके से ऐसे प्रशासनिक अधिकारियों के ऊपर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और इन्हें कुर्सी पर बैठने का कोई अधिकार नहीं है जो नियम के विरुद्ध और संविधान के खिलाफ ऐसे कार्य किया जा रहे हैं

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