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देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज ब्यूरो चीफ

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एमसी बी.जिला की खबर

लोकेशन बिछिया टोला केवाई नदी

 

चोरी और ऊपर से सीनाजोरी: रेत माफियाओं की गुंडागर्दी के आगे नतमस्तक पुलिस-प्रशासन, जन-प्रतिनिधियों के संरक्षण में ‘नदी छलनी’ का खेल

 

 

 

 

लोकेशन

ग्राम पंचायत बिछिया टोला नदी

 

एमसीबी (मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर): जिले के थाना केलाहारी क्षेत्र में रेत माफियाओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब कानून का डर खत्म होता दिख रहा है। सत्ताधारी दल के जन-प्रतिनिधियों के संरक्षण में यहाँ अवैध रेत का काला कारोबार फल-फूल रहा है। माफियाओं को हर महीने मिलने वाली ‘मोटी रकम’ और कमीशन की बदौलत खनिज विभाग, स्थानीय प्रशासन और पुलिस पूरी तरह से मूकदर्शक बनी हुई है। इस गुंडागर्दी का शिकार हुए ग्राम बिछियाटोला के कमल नयन तिवारी ने जब अवैध खनन का विरोध कर वीडियो बनाया, तो माफियाओं ने न केवल उसे बेरहमी से पीटा, बल्कि उसका 20-25 हजार रुपये कीमती मोबाइल भी छीन लिया।

जन-प्रतिनिधियों की शह और माफियाओं का ‘राज’

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत के कुछ प्रभावशाली जन-प्रतिनिधियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। दिन-रात नदी से रेत का बेजा खनन कर लाखों-करोड़ों की कमाई की जा रही है। नदी का सीना छलनी कर दिया गया है, जिससे जलस्तर लगातार गिर रहा है। आलम यह है कि कोई भी आम नागरिक यदि माफियाओं की इन हरकतों को देखता है और वीडियो बनाने की कोशिश करता है, तो उसे जान से मारने की धमकी दी जाती है और पीटा जाता है।

थाने में नहीं सुनी गई फरियाद, मिली ‘समझौते’ की नसीहत

पीड़ित कमल नयन तिवारी जब 29 मई की घटना के बाद न्याय की उम्मीद लेकर थाना केलाहारी पहुंचे, तो पुलिस का रवैया और भी हैरान करने वाला था। रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय उन्हें घंटों बैठाया गया और अगले दिन बुलाकर पुलिस ने अपराधियों से समझौता करने का दबाव बनाया। हद तो तब हो गई जब पुलिस की मौजूदगी में ही अपराधी और पुलिस के बीच कथित मिलीभगत नजर आई; पीड़ित का मोबाइल तो वापस दिलाया गया, लेकिन उसमें मौजूद घटना के सबूत (वीडियो) पुलिस की देखरेख में डिलीट करवा दिए गए।

प्रशासन की नाकामी: कलेक्टर को शिकायत के बाद भी सन्नाटा

यह कोई पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी बिछियाटोला में अवैध रेत उत्खनन को लेकर जिला एमसीबी के कलेक्टर राहुल वेंकट जी को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक किसी भी विभाग ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। न खनिज विभाग ने कभी यहां झांकने की हिम्मत दिखाई, न ही दंड अनुविभागीय अधिकारी (SDM) ने स्थल निरीक्षण किया। खनिज माफियाओं का हौसला इतना बुलंद है कि उन्हें अब न पुलिस का डर है, न प्रशासन का।

पीड़ित को जान का खतरा, प्रशासन को दी चेतावनी

एसपी कार्यालय में अपनी फरियाद लेकर पहुंचे पीड़ित कमल नयन तिवारी का कहना है कि उसे अपनी जान का खतरा है। उन्होंने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में उनके साथ कोई अनहोनी घटना घटती है, तो उसके लिए पूर्णतः स्थानीय थाना पुलिस, जिम्मेदार जन-प्रतिनिधि और रेत माफिया जिम्मेदार होंगे। पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि छीने गए मोबाइल के साथ उसे सुरक्षा प्रदान की जाए और अवैध खनन में संलिप्त माफियाओं पर कठोरतम कार्रवाई हो।

क्या ‘भाजपा सरकार’ के शासनकाल में आम नागरिक को न्याय मिलना इतना कठिन हो गया है? क्या अब जनता का मोबाइल छीनना और विरोध करने पर पीटना ही ‘नया कानून’ है? प्रशासन की यह चुप्पी कई गंभी

र सवाल खड़े कर रही है।

 

पीड़ित कमल नायक तिवारी

 

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