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MCB की खबर

:

 

 

देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज

 

लोकेशन चिरमिरी

 

​चिरमिरी में राशन दुकानों का काला साम्राज्य: 37 में से 20 से 22 दुकानों पर पुरुषों और रईसों का कब्जा! 1 साल से ठप पड़ी आवेदन प्रक्रिया और चना-शक्कर की कालाबाजारी से फूटा जनता का गुस्सा!

 

 

 

 

चिरमिरी भुरकुंडी वार्ड क्रमांक 16 शासकीय राशन की ​दुकान क्रमांक 10-15 पर महज 2-3 दिन में ताबड़तोड़

कार्यवाही में तालेबंदी और विधवा महिला पर त्वरित एक्शन, पर खुलेआम हेराफेरी करने वाले रसूखदारों पर मेहरबान क्यों हैं अधिकारी?

अब आप

 

विस्तृत से समझिए

​चिरमिरी (एमसीबी जिला):

छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना था, उन्हें चिरमिरी के भ्रष्ट प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक संरक्षण ने पूरी तरह मखौल बनाकर रख दिया है। शहर में शासकीय उचित मूल्य की दुकानों के आवंटन और संचालन में चल रहा काला कारोबार अब अपनी चरम सीमाओं को पार कर चुका है। एक तरफ जहाँ शहर की हजारों महिलाएँ और युवा रोजगार की तलाश में दर-दर भटक रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की आपराधिक उदासीनता के चलते सारा सिस्टम चंद रसूखदारों के इशारे पर नचाया जा रहा है।

 

​1 साल से ठप पड़ी 14 मई 2025 की आवेदन प्रक्रिया, फाइलों पर जमी धूल

​भ्रष्टाचार की इंतहा इस बात से समझी जा सकती है कि 14 माई.2025 को चिरमिरी अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय द्वारा शासकीय उचित मूल्य दुकानों के आवंटन हेतु 8 प्रस्तावित

 

दुकानों के लिए समूहों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। लेकिन एक साल से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बाद भी उस आवेदन प्रक्रिया को आज तक आगे नहीं खोला गया। आखिर इन फाइलों को क्यों दबाकर रखा गया है? जबकि है सभी आठ राशन की दुकान प्रस्तावित अस्थाई रूप से चलाई जा रही थी इसमें से जन चर्चा का विषय है तीन दुकान उसे व्यक्ति के खाता में दे दी गई जो पहले से 20 से 22 दुकान चला रहे हैं और चिरमिरी में फेमस है बाकी सब फाइलों में दबाकर रख दी गई

 

 

क्या बिना चढ़ावे और सेटिंग के आम नागरिकों या महिला समूहों को योजना का लाभ देना अधिकारियों को मंजूर नहीं है? चिरमिरी में यह चर्चा आम हो चुकी है कि जब तक जेबें गर्म नहीं होंगी और ‘चढ़ावा’ नहीं चढ़ेगा, तब तक किसी सामान्य व्यक्ति को सरकारी दुकान का प्रभार नहीं मिल सकता। आम आदमी और मध्यमवर्गीय व्यक्ति को सरकारी दुकान चलाने का लाभ चिरमिरी में कभी नहीं मिल सकता, क्योंकि यहाँ खेल और कालाबाजारी बहुत जोरों पर है। या फिर वह महिला समूह या वह व्यक्ति किसी राजनीतिक दलों से जुदा ना हो चाहे वह भाजपा का हो या फिर कांग्रेस का पहला कांग्रेस के सहयोगी समर्थकों को शासकीय उचित मूल दुकान चलाने का लाभ मिलता था और आज वर्तमान सरकार के संरक्षण में जो है राजनीतिक संरक्षण से जुड़ा हुआ हो उसे ही शासकीय उचित मूल दुकान चलने का लाभ मिल सकता है आम आदमी या मध्य सामान गरीब व्यक्तियों को सरकारी योजना राशन दुकान का लाभ नहीं मिल सकता है या खेल बहुत जोरों से और बहुत दिनों से शहर में चल रहा है

 

 

​37 दुकानों में 20 से 22 पर पुरुषों का कब्जा, पार्टी बदलकर साम्राज्य चला रहा है ‘किंग’

​आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार, चिरमिरी में कुल 37 शासकीय उचित मूल्य दुकानें चलाई जा रही हैं, जिनमें से 20 से 22 दुकानों पर केवल पुरुषों और पुराने समिति नियमों की आड़ में एक ही व्यक्ति का कब्जा है। पुरानी समूह समिति योजना के तहत महिला समूह में दुकानें चलाई जानी थीं, लेकिन चिरमिरी में हालात बिल्कुल उलट हैं।

​चिरमिरी में चर्चा का विषय बने हुआ है कि ऐसे व्यक्ति व्यक्ति के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है कि वह पहले कांग्रेस पार्टी में था, फिर भाजपा में आया, सरकार बदली तो फिर भाजपा में चला गया, क्योंकि उसे अपने राजनीतिक संरक्षण में अपनी दुकान चलानी है। राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत के दम पर वह अकेले 20 से 22 दुकानें अलग-अलग समूहों में अपने अध्यक्ष-सचिवों को डालकर चलवा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इस व्यक्ति के आधार कार्ड और बैंक खातों की सही तरीके से उच्चस्तरीय जांच हो जाए, तो सब कुछ दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। और जिस महिला समूह में अपने व्यक्तियों को नाम जोड़कर जो चलाया जा रहा है उनका आधार कार्ड और बैंक खाते की जांच हो जाए तो कई बड़े खुलासा होगा

 

कई समूह बंद पड़े थे, जिन्हें कागजों में जिंदा कर दिया गया है—जैसे कि पौड़ी का महिला समूह पुराना N. G. O

भी बंद हो चुका था, जिसे जिंदा करके चलाया जा रहा है जो कि एक भारी जांच का विषय है।

​महिलाओं के लिए 1,000 समूह, पर रोजगार के नाम पर सिर्फ छलावा

​नगर निगम क्षेत्र में महिलाओं को रोजगार देने के लिए लगभग 1,000 महिला स्व-सहायता समूह पंजीकृत किए गए हैं ताकि महिलाओं को रोजगार मिल सके। लेकिन चिरमिरी में महिलाओं के पास रोजगार की भारी कमी है। नगर निगम में महिलाओं को सिर्फ सफाई कर्मचारी (डोर-टू-डोर) और मध्यान भोजन में ही कुछ लोगों को रोजगार मिल पाया है। न तो नगर निगम ध्यान दे रहा है और न ही स्थानीय जनप्रतिनिधि।

​न पुरुषों के पास रोजगार है और न महिलाओं के पास, फिर सारी रोजगार की सुविधा और शासकीय उचित मूल्य दुकानें सिर्फ पुरुषों के खाते में और एक ही व्यक्ति को क्यों दी जा रही हैं? यह सबसे बड़ा जांच का विषय है, लेकिन इस पर कोई जांच नहीं होती और न कोई उंगली उठाता है—बस “जो चल रहा है, चलने दो” की तर्ज पर काम हो रहा है। चिरमिरी अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में यदि महिला समूह द्वारा आवेदन दिया भी जाता है, तो या तो चढ़ावा दो या फिर किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े रहो, तभी दुकान मिलती है। नियम यह कहता है कि महिला समूह की सदस्यों को एक समूह में दुकान चलाने के लिए दो शासकीय उचित मूल दुकान चलाने के लिए दिए जाना चाहिए जाए, लेकिन यहाँ बिना सोर्स, पावर या चढ़ावे के

एक महिला समूह को एक दुकान शासकीय राशन दुकान

 

मिलना असंभव है। जबकि राशन दुकानों की यह योजना छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को मजबूत और सशक्त बनाने के लिए बनाई थी,

चिरमिरी शहर में सब कुछ उल्टा चल रहा है यहां उसे व्यक्ति के द्वारा राशन की दुकान चलाई जा रही है जिसके पास

 

गाड़ी-बंगले वाले और मजबूत पुरुष इन्हें चला रहे हैं।

महिलाओं के पास रोजगार काम नहीं मिलने और होने के वजह से महिलाएं गलत रास्ते पर जा रही हैं या मजबूर है आत्महत्या करने पर घर के और पारिवारिक आर्थिक तागि से परेशान है मगर ना तो यहां के स्थानीय जनप्रतिनिधि मंत्री ध्यान देते हैं ना प्रशासनिक अधिकारी ऐसे में महिलाओं को मजबूत और सशक्त बनाने की योजना पूरी तरह से सरकार की फेल नजर आती है

 

 

​दुकान क्रमांक 10-15 और विधवा महिला पर ताबड़तोड़ एक्शन, पर अधिकारियों की मिलीभगत

​हाल ही में वार्ड क्रमांक16 भुरकुंडी स्थित दुकान क्रमाक 10-15 और को. लेकर प्रशासनिक अमले ने जो फुर्ती दिखाई, उसने अधिकारियों की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 23 जुलाई को दुकान की जांच के नाम पर रेड डाली गई और अगले ही दिन 24 जुलाई को शनिवार की छुट्टी के दिन तहसीलदार को भेजकर ताला तुड़वा दिया गया। कार्रवाई इतनी तेज थी कि एसडीएम के आदेश एवं खाद्य इंस्पेक्टर व तहसीलदार मौके पर पहुंचे और पूरी ताकत के साथ ताला तोड़ा गया।

​दुकान क्रमांक 10-15 में नमक स्वच्छता पर ध्यान न देने, दुकान के बाहर गंदगी मिलने, बोर्ड पर नाम-नंबर न लिखे होने और चावल भंडारण में कमी का हवाला दिया गया। दुकान विक्रेता की मनमानी की लगातार शिकायतें आ रही थीं जो कहती थीं “जो करना है कर लो”, और दुकान संचालक महिला नीता डे ने अपना लिखित जवाब एसडीएम कार्यालय में समय पर दे दिया था। उनके द्वारा बताया गया.लेकिन शातिर तरीके से एसडीएम कार्यालय से उनका जवाब ही ‘गायब’ करा दिया गया। नियम यह कहता है कि अगर वितरण सामग्री या विक्रेता में अनियमितता पाई जाए तो विक्रेता को हटाना चाहिए, मगर कोई नियम-कानून ताक पर रखकर सीधे दुकान मालिक/संचालक महिला से दुकान ही छीन ली गई और प्रस्तावित प्रभार उसी चहेते व्यक्ति को दे दिया गया जिसे अधिकारी चाहते हैं। इतनी जल्दबाजी क्यों रहती है? क्या सब कुछ सेटिंग और ले-देकर हुआ है?

 

जबकि शासकीय उचित मूल दुकानों की लगातार शिकायत कई दुकानों पर पत्रकारों के द्वारा और स्थानीय राशन कार्ड धारकों के द्वारा

​चना और शक्कर की खुली कालाबाजारी, गहरी नींद में सोता खाद्य विभाग

 

 

​चिरमिरी की राशन दुकानों में हर महीने मिलने वाले राशन में बड़े पैमाने पर धांधली जारी है। शासकीय उचित मूल्य दुकानों से लगातार चना और शक्कर की कालाबाजारी की जा रही है। आज भी चिरमिरी की कई शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर चना का वितरण नहीं हो रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद चिरमिरी के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम), खाद्य विभाग और फूड इंस्पेक्टर गहरी नींद में सोते रहते हैं, इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती। जनता के हितों से जुड़ा यह गंभीर मामला होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर आंखें मूंद ली जाती हैं।

​इन दुकानों पर क्यों नहीं होती कार्रवाई? (अनियमितताओं की लंबी फेरिस्त)

आज भी शासकीय उच्चतर दुकानों में चना का वितरण नहीं किया जा रहा है कट धारकों के सवाल है लेकिन जवाब अधिकारियों के पास नहीं है अगले तीन माह का चना शक्कर वितरण पर कई राशन कार्ड धारकों को चना और शक्कर का वितरण नहीं किया गया कई शिकायत पर कोई कार्यवाही नहीं कोई दुकान निरस्त नहीं कोई नोटिस नहीं कोई जांच नहीं

 

​शहर की राशन दुकानों की जमीनी हकीकत बेहद दयनीय है और कई जगह नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन खाद्य विभाग आँखें मूंदकर बैठा है:

 

​वार्ड क्रमांक 11 (सड़क दफाई – दुकान 1024): दुकान के बाहर न बोर्ड है, न नाम-नंबर, दुकान के बाहर कुछ भी नहीं लिखा है सिर्फ एक आम आदमी और व्यापारी की दुकान के जैसे शासकीय उचित मूल दुकान पिछले 6 महीने से दिख रही है

 

और चावल खुले में जमीन पर गंदगी के बीच रखा है।

​वार्ड क्रमांक 12 (चर्च के सामने – दुकान 1005): कुछ दिन पहले यहाँ चावल की हेराफेरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया, लेकिन एसडीएम और फूड इंस्पेक्टर की शह पर आज भी दुकान उसी व्यक्ति द्वारा चलाई जा रही है, कोई कार्रवाई नहीं हुई।

​वार्ड क्रमांक 13 (हल्दीबाड़ी): शासकीय उचित मूल्य दुकान पर भारी अनियमितताएं पाई गई हैं। दुकानों के भीतर भंडारण की क्षमता नहीं है, जिसके अभाव में चावल सीधे जमीन पर बोरियों में रखा जा रहा है, पानी छू रहा है (छतों से पानी टपक रहा है), लेकिन एसडीएम और फूड इंस्पेक्टर को यह कुछ नहीं दिखता।

​गोदरी पारा (क्षेत्रीय अस्पताल के पास): दुकान के बाहर गंदगी का अंबार है और नमक खुले में रखा रहता है जिसे जानवर भी चाटते हैं।

​गोदरी पारा (एकता नगर व स्टेडियम के पास): दुकानें या तो अक्सर बंद रहती हैं या उनके बाहर खुला नमक रखा रहता है। चिरमिरी के 37 शासकीय उचित मूल दुकानों में से 70% दुकान में शिकायत और अनियमिताएं साफ देखने मिल रही है और चावल राशन रखने की दुकान की भंडार क्षमता की कमी और जमीन पर चावल रख सांप पाया जा रहा है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं सबकी जेब गर्म हो रही है सबके कमीशन बंदे हैं अधिकारियों को मिल रही है मोटी रकम

 

​इन तमाम शिकायतों के वीडियो विजुअल्स और तस्वीरें भी साफ देखी जा सकती हैं, लेकिन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।

​निष्पक्ष जांच की मांग, खुलेगा काला चिट्ठा

​चिरमिरी की जनता, बेरोजगार महिलाओं और जागरूक नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि इस पूरे सिंडिकेट, भ्रष्टाचार, चना-शक्कर की कालाबाजारी और एक ही व्यक्ति के पास 20-…

22 दुकानों के अवैध संचालन की उच्चस्तरीय जांच नहीं कराई गई, तो जल्द संभाग ब्यूरो की आवाज़ न्यूज़) के माध्यम से बहुत जल्द इन भ्रष्ट अधिकारियों, खाद्य निरीक्षकों और रसूखदारों का पूरा काला चिट्ठा और पोल खोलकर जनता के सामने रख दी जाएगी!

 

आगे आपको इस शासकीय उचित मूल दुकानों से जुड़ी कई कल चिटे भ्रष्टाचारी के पूरे समाचार दिखाएंगे

चिरमिरी के शासकीय उचित मूल दुकानों पर लगातार कई दुकानों पर अनियमिताएं और शिकायत मगर नियम कानून और कार्यवाही सिर्फ वार्ड क्रमांक 16 भुरकुंडी राशन दुकान 10:15 पर ही बड़ी ईमानदारी से खाद्य विभाग की टीम फूल इंस्पेक्टर चिरमिरी अनुविभागी अधिकारी और तहसीलदार के निगरानी में की

कुछ दिन पहले हल्दीबाड़ी वार्ड क्रमांक 12 1005 चर्च के सामने शासकीय उचित मूल दुकान पर चावल की हेरा फेरी करती रंगे हाथ पकड़ा गया व्यक्ति मगर इस दुकान पर ना निरस्त हुई ना करवाई हुई ना जांच हुई ना पुलिस स्पेक्टर आए ना एसडीएम ना तहसीलदार आज भी दुकान धंधा से चल रही है जबकि लगातार कई पत्रकारों ने समाचार प्रदर्शित किया दिखाए लेकिन प्रशासन की कार्यवाही न होने पर जेब गर्म होने की जन चर्चा बनी हुई है

आठ प्रस्तावित दुकान 2025 14 तारीख पांचवा महीना चिरमिरी अनुविभाग्य अधिकारी कार्यालय में महिला समूह के द्वारा आवेदन आमंत्रित किया गया था आज तक 8 प्रस्तावित दुकान की आवंटित कार्यवाही फाइलों में दबा दिया गया और जन चर्चा है कि उसमें से कुछ दुकान उसे व्यक्ति को दिया गया है जो अधिकारियों के चाहते हैं जो पहले से 20 और 22 दुकान चला रहे हैं जो भारी जांच का विषय है

यह शासकीय राशन दुकान गोदरी पारा रीजनल अस्पताल के पास की है जहां पर गंदगी और स्वच्छता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं मगर न चिरमिरी अनुविभागी अधिकारी एसडीएम ना खाद विभाग फुल इंस्पेक्टर के द्वारा कोई कार्यवाही ना जांच ना कोई नोटिस जारी किया जाता ना जांच किया जाता है दुकान के अंदर भी चावल जमीन पर खुले में रखा गया कई बोरी चावल की पानी में भीग.के खराब हो गई चिरमिरी के कई शासकीय उचित मूल्य दुकानों पर भंडार रखने की क्षमता तक नहीं है और पानी चुराहा.है लेकिन

दुकानों के अंदर और नमक बाहर लावारिस पशुओं के हवाले छोड़ दिया गया है अनियमिताएं और शिकायत चिरमिरी के 37 दुकानों में 70% दुकानों में है मगर शिकायत और कार्यवाही सिर्फ एक ही दुकान पर की गई जहां करनी चाहिए वहां कार्रवाई नहीं होती है ना जाते हैं अधिकारी

वार्ड क्रमांक 16 भुरकुंडी राशन की दुकान पर 10 15 दुकान क्रमांक नंबर स्थानीय लोग और राशन कार्ड धारकों की शिकायत पर तत्काल कार्यवाही पूरी ताकत और पूरी ईमानदारी से लगता है चिरमिरी एसडीएम के आदेश पर फूल इंस्पेक्टर की कार्यवाही लिखित चिरमिरी तहसीलदार के द्वारा ताला तोड़ा गया 23 तारीख को कार्यवाही 24 तारीख को. शनिवार छुट्टी के दिन ताला तोड़कर दुकान उसे व्यक्ति को दिया गया जो अधिकारियों के चाहते वह व्यक्ति हैं जो पहले से 20 से 22 दुकान चला रहे हैं जितने भी दुकान निरस्त की जाती है ना उसका विज्ञापन निकलता है ना कोई सूचना जानकारी शहर में नहीं मिल पाती है और

सारी दुकान यह उसी व्यक्ति को देते हैं जो पहले से कई दुकान चला.रहा है प्रभार और प्रस्तावित दुकान को प्रभार उसी को दिया जाता है अन्य समूह अन्य व्यक्ति के खाते में या उन्हें देने की अनुमति फूल इंस्पेक्टर और चिरमिरी दंड अनुभाग्य के द्वारा नहीं की जाती है लगातार राशन दुकानों पर कई शिकायत है चना शक्कर की कालाबाजारी शिकायत और नहीं मिलने पर चिरमिरी के एसडीएम और फूड इंस्पेक्टर की कोई कार्यवाही देखने नहीं मिलती है और अभी वर्तमान में चिरमिरी के शासकीय उचित मूल दुकानों पर चना का वितरण नहीं किया जा रहा है लेकिन शासकीय उचित मूल दुकान के अधिकारी के पास कोई जवाब नहीं है

खुले में रखा गया नमक जो स्वच्छता और गंदगी आवारा पशुओं को खाने के लिए छोड़ दिया गया है

 

 

शासकीय उचित मूल दुकानों से जुड़ी कई बड़ी शिकायत और कालाबाजारी भ्रष्टाचारी दुकान की अनियमितताएं का काला चिट्ठा जल्द पूरी दिखाया जाएगा समाचार के माध्यम

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