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देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की
लोकेशन चिरमिरी गोदरीपारा
राशन व्यवस्था पर गंभीर सवाल
चिरमिरी में राशन का कथित बड़ा रैकेट!
18 दुकानों से जुड़े एक ही व्यक्ति पर गंभीर सवाल, घर से रोज निकलती पिकअप; चावल की हेराफेरी से लाखों की कथित कमाई की चर्चा
चिरमिरी। एमसीबी जिले के चिरमिरी क्षेत्र में शासकीय उचित मूल्य राशन दुकानों की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल लगातार उठ रहे हैं। चावल की कथित हेराफेरी, चना-शक्कर के वितरण में गड़बड़ी और कालाबाजारी के आरोपों के बीच अब करीब 18 राशन दुकानों से जुड़े एक ही व्यक्ति की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
हमारी पड़ताल में गोदरीपाड़ा स्थित संबंधित व्यक्ति के घर से पिकअप गाड़ी निकलते हुए कैमरे में दिखाई दी। आरोप है कि यह किसी एक दिन की गतिविधि नहीं है, बल्कि पिकअप की आवाजाही नियमित रूप से होती है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 18 राशन दुकानों से जुड़े व्यक्ति के घर में लोड पिकअप गाड़ी का क्या काम है और घर में चावल का भंडारण क्यों रखा गया है।
यदि घर में शासकीय राशन से संबंधित चावल रखा जा रहा है तो उसका स्रोत, स्टॉक और संबंधित दस्तावेजों से मिलान प्रशासन को तत्काल करना चाहिए।
एक दुकान के पीछे ₹40 हजार की कमाई की चर्चा!
स्थानीय स्तर पर जनचर्चा यह भी है कि एक राशन दुकान से करीब ₹40 हजार तक की मासिक कमाई होती है। वहीं चावल की कथित बड़ी हेराफेरी के जरिए संबंधित नेटवर्क से महीने में अतिरिक्त ₹4 से ₹5 लाख तक की कमाई किए जाने के आरोप और चर्चाएं भी सामने आ रही हैं।
इन रकमों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन यदि गरीब हितग्राहियों के हिस्से के चावल की हेराफेरी से इस प्रकार की कमाई की जा रही है तो यह बेहद गंभीर मामला होगा।
और यहीं से एक और बड़ा सवाल उठता है—यदि इतने बड़े स्तर पर राशन का खेल चल रहा है तो क्या संबंधित अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह विफल है?
अधिकारियों की भूमिका पर भी जांच जरूरी
स्थानीय स्तर पर अधिकारियों की कथित मिलीभगत और आर्थिक लेन-देन के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए इसकी वास्तविकता जांच का विषय है।
लेकिन सार्वजनिक वितरण प्रणाली में यदि नियमित रूप से राशन का परिवहन, स्टॉक और वितरण दर्ज होता है, तो बड़े स्तर पर किसी भी गड़बड़ी का पता लगाने के लिए रिकॉर्ड मौजूद होना चाहिए।
खड़गवां गोदाम से कितनी मात्रा निकली, किस दुकान को कितनी मिली, दुकान में कितना स्टॉक बचा और हितग्राहियों को वास्तव में कितना वितरण हुआ—इन चारों का मिलान ही पूरे मामले की असली तस्वीर सामने ला सकता है।
कई स्थानों पर कथित गोदामनुमा व्यवस्था
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि संबंधित व्यक्ति ने कई स्थानों पर गोदामनुमा जगह बना रखी हैं, जहां चावल रखे जाने की बात कही जा रही है।
प्रशासन को संबंधित घर के साथ-साथ बताए जा रहे सभी स्थानों का भौतिक सत्यापन करना चाहिए।
यदि मौके पर चावल मिलता है तो उसके स्रोत, स्टॉक और दस्तावेजों का मिलान किया जाए।
दिन में राइस मिल तक आवाजाही, रात में पिकअप लोड होने का आरोप
पड़ताल के दौरान पिकअप संबंधित घर से निकलते हुए रिकॉर्ड की गई और डोमहील क्षेत्र में राइस मिल की दिशा में जाती दिखाई दी। वाहन संबंधी पहचान भी रिकॉर्डिंग में दिखाई दे रही है।
स्थानीय आरोपों के मुताबिक दिन में भी चावल से भरी पिकअप की आवाजाही होती है और रात के समय भी पिकअप लोड किए जाने की बात कही जा रही है।
यदि यह व्यवस्था वास्तव में चल रही है तो इसकी जांच के लिए प्रशासन को मौके पर पहुंचकर लोडिंग, परिवहन और स्टॉक का भौतिक सत्यापन करना चाहिए।
पांच वर्षों से राजनीतिक संरक्षण की चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि संबंधित व्यक्ति पिछले लगभग पांच वर्षों से राशन दुकान से जुड़े कामकाज में सक्रिय है और पूर्व सरकार के दौरान भी राजनीतिक संरक्षण मिलने के आरोपों के बीच उसका प्रभाव बना रहा।
सत्ता परिवर्तन के बाद राजनीतिक नजदीकियों को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं हैं। पहले कांग्रेस के राजनीतिक नेतृत्व के करीब रहने और अब वर्तमान सत्ता व्यवस्था के साथ नजदीकी होने के दावे किए जा रहे हैं।
इन राजनीतिक संबंधों अथवा किसी दल से संरक्षण मिलने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लेकिन सवाल यह है कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ लगातार राशन व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें और आरोप सामने आते रहे हैं तो पिछले कई वर्षों में उसकी निष्पक्ष जांच क्यों नहीं हुई?
यदि राजनीतिक संरक्षण के कारण किसी व्यक्ति का मनोबल बढ़ने की बात कही जा रही है तो इसकी भी जांच होनी चाहिए।
18 दुकानों से जुड़े प्रस्ताव पर सबसे बड़ा सवाल
चिरमिरी क्षेत्र में लगभग 37 उचित मूल्य दुकानें हैं। इनमें करीब 18 दुकानों के एक ही व्यक्ति से जुड़े प्रस्ताव अथवा संचालन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
दुकान निरस्त होने अथवा संचालन में बदलाव के बाद किस प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव तैयार होते हैं और क्या सभी पात्र समितियों को समान अवसर दिया जाता है—इसका रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।
चना और शक्कर की शिकायतें भी
चावल के अलावा चना नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। शक्कर के वितरण को लेकर भी गड़बड़ी और कालाबाजारी के आरोप लगाए जा रहे हैं।
ऐसे में दुकानवार स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, गोदाम से जारी मात्रा और हितग्राहियों को वितरित मात्रा का मिलान जरूरी है।
जिला खाद्य अधिकारी से जवाब लेने की कोशिश
मामले में जिला खाद्य अधिकारी का पक्ष जानने के लिए मनेन्द्रगढ़ कलेक्टर कार्यालय में करीब दो घंटे तक इंतजार किया गया।
फोन पर अधिकारी के कलेक्टर के पास होने की जानकारी मिली और आने की बात कही गई। बाद में अधिकारी के निकलने की जानकारी मिलने के बावजूद मीडिया को उनका स्पष्ट पक्ष नहीं मिल सका।
कई जगह जानकारी लेने के बाद भी मुलाकात नहीं हुई और बाद में मोबाइल स्विच ऑफ बताया गया।
इतने गंभीर आरोपों के बीच विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना बेहद जरूरी है।
RTI के जवाब को लेकर भी सवाल
राशन दुकानों से संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए RTI के माध्यम से जानकारी मांगने का प्रयास किया गया। आरोप है कि स्पष्ट जवाब देने के बजाय आवेदक को अलग-अलग कार्यालयों के बीच भेजकर गुमराह किया जाता है।
अब उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर राज्य स्तर के संबंधित खाद्य एवं सूचना अधिकारियों के समक्ष जांच के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की तैयारी है।
पांच साल पुराना मामला, सवाल आज भी कायम
मामला केवल आज की किसी एक घटना तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। स्थानीय चर्चाओं और शिकायतों के अनुसार राशन व्यवस्था से जुड़ी यह गतिविधियां पिछले कई वर्षों से चलने के आरोप हैं।
सत्ता परिवर्तन के बावजूद यदि किसी व्यक्ति का प्रभाव और राशन दुकानों पर पकड़ बनी रहने की बात सामने आती है तो यह प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तर पर जांच का विषय है।
सवाल यह भी है कि यदि सब कुछ नियम के अनुसार है तो जांच से डर कैसा?
और यदि कहीं गड़बड़ी नहीं है तो संबंधित विभाग दस्तावेज सामने रखकर स्थिति स्पष्ट कर सकता है।
अब जांच घर से शुरू होनी चाहिए
जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
18 दुकानों से जुड़े व्यक्ति का घर, वहां रखा कथित चावल, बताए जा रहे गोदामनुमा स्थान, पिकअप वाहन, खड़गवां गोदाम, संबंधित राशन दुकानें और डोमहील की राइस मिल—पूरी कड़ी की जांच होनी चाहिए।
पिछले पांच वर्षों के राशन दुकान संबंधी प्रस्ताव, निरस्तीकरण, संचालन परिवर्तन और स्टॉक रिकॉर्ड की भी जांच आवश्यक है।
यदि आरोप गलत हैं तो दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करना प्रशासन का दायित्व होगा।
हमारी पड़ताल जारी रहेगी
राशन दुकानों में कथित चावल हेराफेरी के इस पूरे मामले की पड़ताल यहीं खत्म नहीं होगी।
पिकअप की आवाजाही, वाहन संबंधी रिकॉर्ड, दुकानों से जुड़े दस्तावेज, कथित भंडारण स्थल और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को आगे भी सामने लाया जाएगा।
गरीबों के हिस्से का चावल किसी की निजी कमाई का साधन नहीं बनना चाहिए।
आज नहीं तो कल—सच सामने आएगा।
हमारी पड़ताल जारी रहेगी और चिरमिरी की राशन दुकानों के इस कथित बड़े रैकेट का पूरा सच सामने लाने तक सवाल उठते रहेंगे।

चिरमिरी के खड़गवां राशन गोदाम से राशन की दुकान तक से लेकर गोदरी पारा 18 दुकान के मालिक किंग के घर से राशन दुकानों का बड़ा हेरा फेरी राइस मील तक का सफर किस तरह चल रहा है पूरा राकेट राजनीतिक संरक्षण प्राप्त पहले कांग्रेस में थे आज वर्तमान सरकार में है सत्ता परिवर्तन होते ही अपनी दुकान चलाने के लिए सत्ता बदलते ही सत्ता परिवर्तन करके अपना कारोबार चलाते हैं पूरा खेल और रैकेट चल रहा है खुलेआम

हमारे द्वारा,जिला कलेक्टर कार्यालय के खाद्य अधिकारी से हमने उनका पक्ष और व्हाइट लेने की कोशिश की गई 2 घंटे जिला खाद्य अधिकारी का कलेक्टर कार्यालय में इंतजार किया गया फोन लगाया गया जिला खाद्य अधिकारी के द्वारा बताया गया कलेक्टर के साथ बैठा हूं आता हूं 1 घंटे के बाद मोबाइल स्विच ऑफ कर दिया गया पूरे कार्यालय का हमारे जिला खाद्य अधिकारी को संपर्क करने की कोशिश की गई मगर कहीं उनकी उपस्थित नजर नहीं आई मीडिया से दूरी बनाते मोबाइल को स्विच ऑफ कर दिया गया जिससे साफ पता चलता है

हमारी पड़ताल में और रिपोर्टिंग के समय चिरमिरी के गोदरीपारा बी टाइप महात्मा गांधी ग्राउंड के बगल में 18 दुकान के किंग मलिक के यहां सुबह के 7:00 बजे हैं पिकअप से भरा राशन सरकारी लोड होता है और कुछ ही देर में 18 दुकान के मालिक किंग के घर से निकलते हुए डोमेनहील की और रावना होता है जिसे हमने कैमरा में कैद किया और सीधा पिकअप गाड़ी नंबर के साथ देख सकते हैं या फिर एक दिन नहीं प्रतिदिन चलता है 18 दुकान के किंग मलिक के घर में खुद दुकान राशन की है और उनके यहां पिकअप का खड़ा होना और प्रतिदिन यहां से गाड़ी लोड होकर रवाना किया जाता है जो सीधे अपराध और चावल की हेरा फेरी का सीधा सवाल खड़ा करता है और उनके घर पर चावल का बड़ा भंडारा भी हमेशा उपलब्ध रहता है,, ना खाद्य अधिकारी की कोई जांच ना फुलस्पेक्टर की कोई जांच,, ना एसडीएम की कोई जांच जबकि गोदरी पारा के हर एक छोटे बच्चों से लेकर बड़े व्यक्तियों तक को पता है इनके कालाबाजारी चावल के करने को लेकर तो अधिकारियों को कैसे खबर नहीं है खबर होते हुए भी बेखबर बने हैं

कोई जांच नहीं अनुविभागीय अधिकारी की ईनके काले चिट्ठे और कारनामे हम आगे भी आपके,, बहुत कुछ दिखाएंगे जो हैरान करने वाला आएगा जो हमने कैमरा और मोबाइल पर रिकॉर्ड करके रखा है आगे की एपिसोड में
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