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देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज
चिरमिरी के अस्थायी जिला अस्पताल में मरीजों की थाली से पौष्टिक आहार गायब!
लिस्ट में दूध-अंडा और फल, लेकिन मरीजों के मुंह तक नहीं पहुंच रहा पौष्टिक आहार; ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आए गंभीर सवाल
लोकेशन—चिरमिरी
कैमरामैन के साथ ग्राउंड रिपोर्ट
चिरमिरी के बड़ी बाजार स्थित अस्थायी जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिए जाने वाले पौष्टिक आहार को लेकर हमारी पड़ताल में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। अस्पताल की भोजन व्यवस्था में मरीजों की थाली से पौष्टिक आहार गायब होने का मामला सामने आया है।
न्यूज़ ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान जब अस्पताल की रसोई में भोजन व्यवस्था को लेकर रसोईया से जानकारी ली गई तो बातचीत में कई ऐसी बातें सामने आईं, जिन्होंने अस्पताल की भोजन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
रसोईया ने बताया कि पिछले कई दिनों से अकेले रहने के कारण मरीजों के लिए भोजन बनाने और बांटने में कमी हो रही है। वहीं कैमरे के सामने रसोईया की ओर से यह भी कहा गया कि “ठेकेदार जो देगा, वही तो हम बांटेंगे।”
अब सवाल यह है कि अगर ठेकेदार की ओर से ही भोजन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है तो मरीजों के लिए निर्धारित पौष्टिक आहार आखिर कहां जा रहा है?
लिस्ट में लंबी-चौड़ी व्यवस्था, मरीजों की थाली में कमी क्यों?
अस्पताल में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की बाकायदा एक सूची बनाई गई है। इस सूची में दूध, अंडा, फल, चाय-नाश्ता, बिस्किट सहित अलग-अलग खाद्य सामग्री और उनकी निर्धारित मात्रा का उल्लेख किया गया है।
लेकिन हमारी पड़ताल में बड़ा सवाल यही सामने आया कि जो चीजें सरकारी/अस्पताल की भोजन सूची में लिखी हैं, क्या वे वास्तव में मरीजों तक पहुंच रही हैं?
हैरानी की बात यह भी सामने आई कि मरीजों को दिए जाने वाले पौष्टिक आहार की सूची को रसोई के कमरे में इस तरह लगाया गया है कि आम जनता और मीडिया की नजर उस पर आसानी से न पड़े। आखिर ऐसी क्या वजह है कि मरीजों के भोजन की सूची को सामने रखने के बजाय उसे छिपाने जैसी स्थिति दिखाई दे रही है?
चार-छह दिन से भर्ती मरीजों ने खोली भोजन व्यवस्था की पोल
हमारी टीम ने अस्पताल में चार से छह दिनों से भर्ती कई मरीजों से बातचीत की। मरीजों ने भोजन व्यवस्था को लेकर जो बातें बताईं, वे चौंकाने वाली हैं।
मरीजों के अनुसार—
भोजन में स्वाद नहीं रहता।
एक रोटी देने के बाद दोबारा रोटी मांगने पर नहीं दी जाती।
दूध और अंडा नहीं दिया जाता।
सुबह की चाय कई बार काली चाय के रूप में दी जाती है।
शाम करीब चार बजे मिलने वाला नाश्ता भी नहीं दिया जाता।
जब भोजन की निर्धारित सूची में दूध, अंडा, फल, चाय-नाश्ता और बिस्किट जैसी पौष्टिक चीजें दर्ज हैं, तो फिर मरीजों की थाली में ये चीजें क्यों दिखाई नहीं दे रही हैं?
मरीज का पेट काटकर किसकी जेब भरी जा रही है?
यह मामला सिर्फ भोजन की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि मरीजों के अधिकार और अस्पताल की भोजन व्यवस्था की पारदर्शिता का सवाल है।
अगर मरीजों के लिए निर्धारित दूध, अंडा, फल और अन्य पौष्टिक सामग्री कागज पर दर्ज है, लेकिन वास्तविकता में मरीजों को नहीं मिल रही, तो फिर इस पूरी व्यवस्था की जांच कौन करेगा?
क्या ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होगी?
क्या अस्पताल प्रबंधन इसकी जांच करेगा?
क्या मरीजों को निर्धारित मात्रा में भोजन और पौष्टिक आहार वास्तव में मिल रहा है?
और अगर नहीं मिल रहा, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
कुपोषण और बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए पौष्टिक भोजन इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में अगर अस्पताल में भर्ती मरीजों को दूध, अंडा, फल और निर्धारित पौष्टिक आहार ही नहीं मिलेगा, तो मरीजों की रिकवरी कैसे होगी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि कागजों में मरीजों की थाली भरपूर है, लेकिन हकीकत में थाली अधूरी क्यों है?
हमारी यह ग्राउंड रिपोर्ट अस्पताल की भोजन व्यवस्था पर सीधे सवाल खड़े करती है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले की जांच कर मरीजों को उनका निर्धारित पौष्टिक आहार दिलाते हैं या फिर यह व्यवस्था इसी तरह चलती रहती है।
देखिए हमारी पूरी ग्राउंड रिपोर्ट—कैमरे में दर्ज बातचीत और मरीजों से हुई बातचीत के साथ।

चिरमिरी जिला अस्पताल के मरीजों की थाली से पोस्टिक आहार गोल



चिरमिरी के जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों से जब पूछने पर जो सच सामने आया वह चौका देने वाला था 4 से 6 दिन तक भर्ती मरीजों ने बताया सुबह चाय काली दी जाती है 4:00 चाय या नाश्ता कुछ नहीं मिलता है अंडा और दूध पौष्टिक आहार भर्ती मरीजो को नहीं दिया जाता है कई प्रमुख पौष्टिक का आहार मरीज के थाली से दूर

अस्थाई जिला अस्पताल चिरमिरी बड़ी बाजार का जिसमें लगातार मंत्री जी के प्रयासों से मरीज को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए दिन-रात एक किया जा रहा है



चिरमिरी जिला अस्पताल में दिए जाने वाली मरीजों की पौष्टिक आहार की लिस्ट चिरमिरी के जिला अस्पताल रसोई रूम पर टांग के रखी गई है मीडिया और आम जनता के नजरों से बचा के जिसे आसानी से ठेकेदार मरीज को दिए जाने वाली पौष्टिक आहार की चोरी कर सके और मरीज का अधिकार मार के मरीज के भोजन बनाने वाले ठेकेदारों का पेट भर सके आखिर यह कहां जाता है पौष्टिक आहार दूध और अंडा फल फ्रूट और कई महत्वपूर्ण पौष्टिक महंगी दिए जाने वाली सामग्री भोजन आखिर किसके इशारे पर यह सब किया जा रहा है यह सबसे बड़ा जांच का विषय है आप देख सकते हैं लिस्ट में बाकायदा मरीज को दिए जाने वाला पौष्टिक आहार के प्रमुख अंडा और दूध लिस्ट में टंगा है और कितनी मात्रा में देना है यह भी टंगा है लेकिन सिर्फ वह लिस्ट में ही नजर आ रही है अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीज उनके मुंह तक नहीं पहुंच पा रही है हमारी टीम की पड़ताल से यह जो सच सामने आया बड़ा ही चौंकाने वाला है अब देखना यह होगा कि मरीजों को पौष्टिक आहार मिल पाएगा या नहीं और यह जो लिस्ट जिला अस्पताल के रसोई रूम से बाहर टागी जाएगी या इसे भी यहां से गोल कर दी जाएगी

जिस जगह मरीजों से पड़ताल की गई या उसे वार्ड की तस्वीर है आखिर इतना बड़ा मरीज के साथ धोखा और उनके पौष्टिक भोजन की कटौती की जा रही है और अस्पताल के मुख्य प्रबंधक को पता है या नहीं लेकिन जो मरीज को पौष्टिक आहार नहीं दिया जाएगा तो वह दवाई और गोली की रिकवरी सिर्फ जल्द स्वस्थ हो पाएंगे जबकि शरीर में पौष्टिक आहार और अच्छे भोजन से शरीर में ऊर्जा ताकत रिकवरी और खून बनने की क्षमता बढ़ती है जिससे शरीर निरोग ऊर्जावान और स्वस्थ ताकतवर बनता है यह हर किसी को पता है उसके बाद भी अस्पताल में इतनी बड़ी लापरवाही जानबूझकर की जा रही है

जिला अस्पताल के रसोईया
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(7000131841)





















