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MCB की खास खबर

देवेंद्र सिंह चंदेल भारत की आवाज

लोकेशन चिरमिरी

 

 

बड़ी बाजार–बरतुंगा मार्ग पर SECL की जेसीबी चली, वार्ड 24-25 का प्रमुख रास्ता हुआ बंद

चिरमिरी OCM की कार्रवाई से बढ़ी परेशानी : सुरक्षा के नाम पर रास्ता बंद, लेकिन वैकल्पिक मार्ग का इंतजाम नहीं — घटती आबादी और पलायन के बीच शहर के अस्तित्व पर भी सवाल

 

 

 

 

चिरमिरी। चिरमिरी OCM यानी खुली कोयला खदान क्षेत्र में SECL की कार्रवाई के बाद बड़ी बाजार से बरतुंगा आने-जाने वाला वर्षों पुराना सार्वजनिक मार्ग तीन-चार जगह जेसीबी से खोदकर बंद कर दिया गया है। यह मार्ग वार्ड क्रमांक 24 और 25 के लोगों के लिए प्रमुख आवागमन का रास्ता रहा है। मार्ग बंद होने के बाद स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

बताया जा रहा है कि जमीन के नीचे कोयले में आग की स्थिति और नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए मार्ग को बंद किया गया है। सुरक्षा का विषय महत्वपूर्ण है, लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है कि यदि रास्ता बंद करना जरूरी था तो पहले वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करने की मजबूरी

बड़ी बाजार–बरतुंगा मार्ग बंद होने के बाद स्थानीय लोगों को दूसरे रास्ते से आवागमन करना पड़ रहा है। इससे कई लोगों को लगभग 10 किलोमीटर तक अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर मजदूर, छोटे दुकानदार और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले आम नागरिक इस समस्या से प्रभावित हो रहे हैं।

जिस वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, वह क्षेत्र कई स्थानों पर सुनसान और जंगल से लगा हुआ बताया जा रहा है। पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय सुरक्षा की चिंता भी बनी रहती है। ऐसे में आम नागरिकों के लिए लंबी दूरी तय करना केवल समय की परेशानी नहीं, बल्कि अतिरिक्त खर्च और सुरक्षा की चुनौती भी बन गया है।

कोयला उत्पादन आगे, लेकिन शहर पीछे?

SECL चिरमिरी OCM में अपने कोयला उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार खनन गतिविधियां आगे बढ़ा रहा है। खनन क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को हटाकर उत्पादन जारी रखना कंपनी की प्राथमिकता हो सकती है, लेकिन सवाल यह है कि खनन के साथ उस क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिकों के आवागमन और मूलभूत सुविधाओं की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि खनन की जरूरतों के सामने आम नागरिकों की सुविधा बार-बार पीछे छूटती जा रही है। रास्ते बंद होने, पुराने मार्ग प्रभावित होने और क्षेत्रों के धीरे-धीरे सुनसान होने से चिरमिरी के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।

कभी आबादी से गुलजार था बरतुंगा

बरतुंगा कभी चिरमिरी के प्रमुख आबादी वाले क्षेत्रों में गिना जाता था। आज लगातार पलायन और सुविधाओं की कमी के कारण क्षेत्र की तस्वीर बदलती नजर आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार चिरमिरी की आबादी में वर्षों से लगातार कमी आई है और शहर से बड़ी संख्या में परिवार बाहर की ओर चले गए हैं।

चिरमिरी को लंबे समय तक कोयले और खदानों के शहर के रूप में पहचान मिली। यहां से निकलने वाले कोयले ने देश की ऊर्जा व्यवस्था को मजबूती दी और आसपास के कई शहरों के विकास में भी योगदान दिया। लेकिन आज वही सवाल चिरमिरी के सामने खड़ा है कि जिस शहर ने वर्षों तक देश और दूसरे शहरों को रोशन करने में योगदान दिया, उसके अपने अस्तित्व और विकास की चिंता कौन करेगा?

30 लाख के मुक्तिधाम से लेकर स्कूल और भवनों तक उठते रहे सवाल

बरतुंगा क्षेत्र में नगर निगम द्वारा बनाए गए करीब 30 लाख रुपये के मुक्तिधाम को खनन गतिविधियों के चलते हटाए जाने का मामला भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा में रहा है। इसके अलावा क्षेत्र के स्कूल के स्थान परिवर्तन से विद्यार्थियों को भी दूर जाकर पढ़ाई करने की परेशानी उठानी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि खनन क्षेत्र में आने वाले कई भवन और अन्य संरचनाएं समय-समय पर हटाई गईं। मेडिकल कॉलेज से संबंधित भवन को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठते रहे हैं। लोगों का कहना है कि विकास और खनन की प्रक्रिया के बीच प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों के लिए स्थायी और बेहतर विकल्प तैयार होना चाहिए।

नगर निगम और SECL के बीच पिसता आम नागरिक

चिरमिरी नगर निगम क्षेत्र में आने वाले कई हिस्सों में आज भी मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोगों की शिकायतें सामने आती रही हैं। बरतुंगा और कोरिया कलरी क्षेत्र के नागरिक भी सड़क, आवागमन और अन्य सुविधाओं को लेकर परेशानियां बताते हैं।

ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम और SECL के बीच आम नागरिक कहीं न कहीं पिसता नजर आ रहा है। एक तरफ SECL अपने खनन और उत्पादन लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम के सामने प्रभावित क्षेत्रों में नागरिक सुविधाएं बनाए रखने की चुनौती है।

SECL से जुड़े बड़े पदाधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद आवाज क्यों नहीं?

बरतुंगा और आसपास के क्षेत्रों में SECL से जुड़े श्रमिक संगठनों के कई बड़े पदाधिकारी और नेता निवास करते हैं। सीटू, एटक सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों से जुड़े पदाधिकारियों की क्षेत्र में सक्रियता भी रही है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब रास्ता आम जनता के लिए बंद किया गया तो इन संगठनों और प्रभावशाली पदाधिकारियों की ओर से वैकल्पिक मार्ग की मांग को लेकर प्रभावी आवाज क्यों नहीं उठाई गई?

लोगों का कहना है कि यह किसी एक राजनीतिक दल या संगठन का मुद्दा नहीं है। यह सीधे हजारों लोगों के रोजमर्रा के आवागमन और सुरक्षा से जुड़ा विषय है।

पूर्व विधायक ने दी आंदोलन की चेतावनी

रास्ता बंद किए जाने के मामले में कांग्रेस से जुड़े जनप्रतिनिधि और पूर्व विधायक की ओर से भी चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है। उनका कहना है कि यदि आम जनता के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध नहीं कराया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

दूसरी ओर क्षेत्र में भाजपा से जुड़े कई नेता और SECL से जुड़े प्रभावशाली लोग भी निवास करते हैं। ऐसे में अब लोगों की नजर इस बात पर है कि राजनीतिक दलों और श्रमिक संगठनों के नेता इस मुद्दे पर एकजुट होकर जनता की आवाज उठाते हैं या नहीं।

मुद्दा किसी पार्टी का नहीं, चिरमिरी के भविष्य का है

बड़ी बाजार–बरतुंगा मार्ग का बंद होना केवल एक सड़क बंद होने का मामला नहीं है। यह उस बड़े सवाल से जुड़ा है कि खनन क्षेत्र में रहने वाली आबादी के अधिकार, सुरक्षित आवागमन और भविष्य की सुविधाओं की जिम्मेदारी किसकी है।

SECL कोयला उत्पादन करे, देश के विकास में योगदान दे—लेकिन इसके साथ प्रभावित क्षेत्र के नागरिकों के लिए सड़क, वैकल्पिक मार्ग, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी होनी चाहिए।

आज जरूरत है कि नगर निगम, SECL प्रबंधन, जनप्रतिनिधि और श्रमिक संगठन एक साथ बैठकर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालें। केवल रास्ता बंद कर देना समाधान नहीं है। जनता को सुरक्षित और सुविधाजनक वैकल्पिक रास्ता देना भी उतना ही जरूरी है।

अब सबसे बड़ा सवाल

क्या SECL अपने उत्पादन लक्ष्य के साथ चिरमिरी के नागरिकों की सुविधा और भविष्य की भी जिम्मेदारी लेगा?

क्या नगर निगम प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की समस्या को गंभीरता से लेकर SECL के साथ स्थायी समाधान निकालेगा?

और सबसे बड़ा सवाल—

जिस चिरमिरी ने दशकों तक कोयला देकर देश और दूसरे शहरों को ऊर्जा दी, क्या आज उसके अपने नागरिकों को सुरक्षित रास्ते और बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ेगा?

 

स्थानीय नागरिकों को और व्यापारियों को आने-जाने में तकलीफ

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